वायुसेना प्रमुख ने 30 जुलाई 2026 को अपनी बात में यह स्पष्ट किया कि सशस्त्र बलों के लिए समय पर उपलब्ध करायी गयी आधुनिक तकनीक नितांत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि तकनीक में देरी होने पर वे उसे सुरक्षा लाभ से वंचित मानते हैं और इसलिए घरेलू क्षमता बढ़ाने पर बल देना चाहिए।

एक ही वक्तव्य में उन्होंने मित्र-आग (फ्रैट्रिसाइड) से बचाव पर भी चिंता जताई। उन्होंने बताया कि ऐसा होना अस्वीकार्य है कि अपने ही ड्रोन या उन प्रणालियों को नज़रंदाज़ कर दिया जाए या उन्हें गलती से गिरा दिया जाए; इसलिए पहचान, नियंत्रण और समन्वय प्रणालियों की मजबूती अनिवार्य है।

ये बातें राष्ट्रीय सुरक्षा और स्वदेशी हथियार प्रणालियों के त्वरित विकास से जुड़ी नीतिगत चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित करती हैं। वायुसेना प्रमुख की टिप्पणी स्वदेशी विकास और खरीद प्रक्रियाओं में गति लाने की मांग के रूप में देखी जा सकती है ताकि परिचालन क्षेत्र में नई तकनीक का लाभ समय पर लिया जा सके और मित्र-शत्रु अलग करने की क्षमताएँ मजबूत हो सकें।

उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार यह संदेश सार्वजनिक या मीडिया मंच पर दिया गया; दोनों प्रकाशित रिपोर्टों ने एक स्वर में इन बिंदुओं को उद्धृत किया। इस वक्तव्य में दिए गए दोनों मुख्य संदेश — तकनीक में देरी को सुरक्षा हानि के रूप में देखना और फ्रैट्रिसाइड को रोकने की ज़रूरत — रक्षा सुझबुझ व परिचालन दक्षता के संदर्भ में अहम माने जा रहे हैं।

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संदर्भ स्रोतNDTV LatestNDTV India