पिछले कुछ दिनों में E20 पेट्रोल (80% पेट्रोल, 20% इथेनॉल) को लेकर उपभोक्ता स्तर पर मिली नाराज़गी और ऑन‑लाइन दावे केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया के केंद्र में आ गए हैं। पेट्रोल में 20% इथेनॉल को अब मानक ईंधन के रूप में देश भर के पेट्रोल पम्पों पर उपलब्ध करवा दिया गया है, लेकिन कुछ वाहनस्वामियों ने माइलेज में कमी और पुरानी इकाइयों में घटिया संचलन‑क्षमता की आशंका जताई।

केंद्र ने इन चिंताओं को सार्वजनिक रूप से संबोधित करते हुए कहा है कि सरकार ने ऑटोमोबाइल कंपनियों पर E20 के संबंध में कोई दबाव नहीं डाला और न ही किसी तथ्य को छुपाने का आग्रह किया गया। सरकार का दावा है कि इस निर्णय से पहले प्रयोगशालात्मक अध्ययन और फील्ड वेलिडेशन किए गए थे और यदि निर्माता चिंतित होते तो वे E20‑अनुकूल वाहनों का प्रमाणीकरण नहीं करते और वारंटी शर्तें लागू नहीं रखते।

केंद्र ने यह भी बताया कि कंपनियों के दावों के सहारे उपलब्ध सर्विस‑डेटा में ईंधन से जुड़े सिस्टमेटिक दोष नहीं मिले। रिपोर्टेड डेटा के अनुसार एक बड़े वाहन निर्माता के सॉल्यूड सर्विस रिकॉर्डों का विश्लेषण और दोपहिया निर्माताओं के सर्विस‑डेटा में E20 से संबंधित असामान्य कऱोशन या भागों की शीघ्र क्षय का कोई प्रमाण नहीं प्राप्त हुआ। केंद्रीय बयान में यह भी कहा गया कि परीक्षण अंतरराष्ट्रीय मानकों और मान्यता प्राप्त प्रोटोकॉल के अनुरूप किए गए थे।

औद्योगिक सूत्रों और सरकारी बयान के अनुसार, हाल के वर्षों में बर्मॅट Stage–6 (BS6) के दूसरे चरण के तहत अप्रैल 2023 के बाद निर्मित पेट्रोल वाहन तकनीकी रूप से E20‑अनुकूल माने जाते हैं; वहीं 2023 से पहले बने ज्यादातर वाहनों के लिए अलग स्थिति बनी रह सकती है।

सरकार ने आगे स्पष्ट किया कि मिश्रण स्तर बढ़ाने पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है और आवश्यकताओं व हितधारकों की सलाह के बाद ही आगे की रणनीति बनाई जाएगी। फिलहाल बेचने के लिए न तो कम मिश्रण वाले ईंधन और न ही शुद्ध पेट्रोल की आपूर्ति का कोई अलग निर्देश जारी किया गया है।

इस रिपोर्ट में शामिल सभी महत्वपूर्ण तथ्य सार्वजनिक सरकारी बयान, निर्माताओं द्वारा प्रस्तुत सर्विस‑डेटा के संदर्भ और परीक्षण संस्थाओं के हवाले से रिपोर्टिंग पर आधारित हैं।

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संदर्भ स्रोतIndian Express BusinessIndian Express Latest
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