दिसंबर में देश ने 16 साल से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया तक पहुंच रोकने वाला नियम लागू किया, जिसका उद्देश्य नीतिगत रूप से बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर चिंता को दूर करना बताया गया। नियम औपचारिक रूप से दस दिसंबर को लागू हुए, और वह दुनिया में एक तरह की पहल मानी गई।

ऑस्ट्रेलिया का इंटरनेट रिग्युलेटर eSafety ने तीन महीने बाद प्रकाशित किए गए सर्वे और स्नैपशॉट डेटा में पाया कि किशोरों के बड़े हिस्से ने सोशल मीडिया उपयोग जारी रखा है। रिग्युलेटर की रिपोर्ट के अनुसार तीन-चौथाई से अधिक नहीं बल्कि आठ में से अधिक किशोर अभी भी प्लेटफॉर्मों का उपयोग कर रहे हैं, जो प्रवर्तन चुनौतियों को रेखांकित करती है।

विशेष रूप से दस से पंद्रह वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के उपयोग की आवृत्ति मार्च में उन बच्चों की तुलना में ज्यादातर नहीं घटी जो प्रतिबंध से पहले ऑनलाइन थे। उसी अवधि में माता-पिता की जागरूकता उनके बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों के बारे में घटती मिली, जिससे पाबंदी के यथार्थ लागू होने में घरेलू निगरानी की सीमाएँ स्पष्ट हुईं।

सरकार ने इन आंकड़ों के सामने नीतिगत रुख का बचाव किया। सहयोगी आर्थिक और नीतिगत मंत्री एंड्रयू लीघ ने कहा कि पाबंदी ने माता-पिता और सार्वजनिक बहस को प्रभावित किया है और कई लाख खाते बंद किए गए हैं, जबकि 100% अनुपालन की उम्मीद ठीक तरह से नहीं की जा सकती। सरकार ने यह भी संकेत दिया कि कानून होने का अपना महत्व बना रहता है, और अनुपालन सुधारने के प्रयास जारी रहेंगे।

इसी पृष्ठभूमि में राजधानी ने प्रवर्तन कड़ी करने के प्रस्ताव पेश किए; इन योजनाओं में उन तकनीकी कंपनियों पर अधिक दंड लगाने के उपाय शामिल हैं जो पाबंदी को लागू करने में विफल रहती हैं — जिनमें अधिकतम दंड को दोगुना करने का विकल्प भी शामिल है। फेसबुक और अन्य बड़ी सोशल मीडिया कंपनियों ने, जिनका मुख्यालय अधिकांशतः अमेरिका में है, पाबंदी पर आलोचना की है।

सरकारी और रिग्युलेटरी आंकड़ों का समन्वय यह दर्शाता है कि कानून बनने के बाद भी असल दुनिया में तकनीकी और व्यवहारिक चुनौतियाँ हैं: उपयोग कम न होना और माता-पिता की कम होती जागरूकता दोनों नीति के लक्ष्यों की सेतु पर सवाल उठाते हैं। आगे के फैसलों में प्रवर्तन-मैकेनिज्म और तकनीकी कंपनियों की जवाबदेही प्रमुख चर्चा का विषय बने रहने की संभावना है।

संदर्भ स्रोतThe Hindu TechnologyIndian Express Technology
पाठकों की राय

टिप्पणियां 0

सभ्य और विषय से जुड़ी भाषा का प्रयोग करें।