सरकारी हिस्सेदारी घटाने के लिए लॉन्च किया गया LIC का दो-दिवसीय OFS पहले दिन संस्थागत निवेशकों की जोरदार हिस्सेदारी के कारण सुर्ख़ियों में आया। ऑफ़र में कुल 6.5% हिस्सेदारी तक बेची जा सकती है, जो आधार (base) 2.5% और 4% की ग्रीन-शू विकल्प से मिलकर बना है।

पहले दिन संस्थागत निवेशकों ने संकेतित मूल्य पर कुल 94.45 करोड़ से अधिक शेयरों के लिए बोली लगाई; इस पर आधारित अनुमानित बोली राशि लगभग ₹36,400 करोड़ के आसपास थी। नियत floor प्राइस ₹382 प्रति शेयर तय किया गया है, जबकि संस्थागतIndicative bid price लगभग ₹383.84 के स्तर पर रहा।

यदि entire 6.5% का विक्रय floor प्राइस पर पूरा होता है तो इससे सरकार के रुझान के मुताबिक़ करीब ₹31,000 करोड़ की प्राप्ति हो सकती है। OFS का रिटेल हिस्सा अगले चरण में खोलना है।

बाजार की तात्कालिक प्रतिक्रिया के रूप में BSE पर LIC के शेयर पहले दिन गिरकर ₹391 पर बंद हुए, जो कि दिन भर में करीब 7.86% की गिरावट दर्शाता है; इस समय कंपनी का मार्केट कैप लगभग ₹4.95 लाख करोड़ आंका गया।

यह प्रस्ताव 2022 के शुरुआती सार्वजनिक प्रस्ताव (IPO) के चार साल बाद आया है, जब सरकार ने कंपनी का 3.5% हिस्सा बेचकर लगभग ₹21,000 करोड़ जुटाए थे। अप्रैल 2026 में LIC बोर्ड ने 1:1 बोनस शेयर मंज़ूर किए थे, और बाज़ार में सार्वजनिक हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए नियामक SEBI ने कंपनी को मई 16, 2027 तक न्यूनतम 10% सार्वजनिक होल्डिंग पूरी करने का समय दिया था।

वर्तमान में सरकार के पास LIC में लगभग 96.5% हिस्सेदारी बनी हुई है। इस वित्तीय वर्ष में अधिकारी स्रोतों के अनुसार केंद्र ने सात सार्वजनिक उपक्रमों में हिस्सेदारी बेचकर और SUUTI के माध्यम से मिलने वाली रेमिटेंस के जरिए कुल लगभग ₹21,082 करोड़ की प्राप्ति की है।

OFS के अगले चरणों में रिटेल की हिस्सेदारी खुलने के बाद ही यह साफ़ होगा कि कुल आवंटन किस प्रकार से पूरा होगा और सरकार की वांछित सार्वजनिक होल्डिंग लक्ष्य कितनी शीघ्रता से हासिल होती है।

संदर्भ स्रोतEconomic Times LatestBusinessLine
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