Reserve Bank of India की Monetary Policy Committee (MPC) ने 5 अगस्त की बैठक की मिनिट्स में संकेत दिए हैं कि हालिया मुद्रास्फीति के उभरते रुझान और जोखिमों के मद्देनजर नीतिगत दर पर आगे की कार्रवाई पर सतर्कता बरती जाएगी। मिनिट्स में कहा गया है कि हेडलाइन मुद्रास्फीति Q3 2026‑27 में 5.9% तक पहुंच सकती है, जिससे वर्ष के दौरान दर बढ़ाने का औचित्य बन सकता है।
आरबीआई गवर्नर ने मुद्रास्फीति के प्रचलित स्तरों की स्थिरता, भविष्यवाणी और सामान्यीकरण की दिशा में और स्पष्टता आने तक नीति दरों में कोई तात्कालिक पुनर्संतुलन नहीं करने को प्राथमिकता देने का आग्रह किया है। आरबीआई के डिप्टी गवर्नर और अन्य MPC सदस्यों ने भी उच्च खाद्य, ईंधन और इनपुट लागत के व्यापक मुद्रास्फीति में परिवर्तन तथा अपेक्षाओं के डि‑एंकर होने के जोखिमों पर सावधानी बरतने का अभिव्यक्ति की।
मीट्रिक्स में यह भी रिकार्ड है कि MPC ने चालू नीति दर (रेपो) को 5.25% पर स्थिर रखा और FY27 के लिए विकास अनुमान को हल्के से 6.7% पर समायोजित किया, जबकि वार्षिक मुद्रास्फीति प्रोजेक्शन को 5.0% पर रखा गया। कुछ सदस्यों ने कहा कि वर्तमान माहौल में और सहजता के लिए स्थान नहीं दिखता और वैश्विक तेल कीमतों, मौसम‑सम्बंधित आपूर्ति झटकों तथा द्वितीयक प्रभावों पर नजर रखी जानी चाहिए; यदि ये जोखिम वास्तविक रूप ले लें तो नीति कठोर करने की आवश्यकता पैदा हो सकती है।

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