सरकार ने उन थोक उपभोक्ताओं के लिए नियम कड़े किए हैं जो महीने में 10 मीट्रिक टन से अधिक चीनी हैंडल करते हैं — इन्हें 15 दिनों से अधिक का माल रखने से रोका गया है; यह व्यवस्था 1 सितंबर से लागू कर 30 नवंबर तक जारी रखी जाएगी, जबकि पहले जून में दिशानिर्देशों के तहत 30 दिन की सीमा लागू थी। इस फैसले के बाद बाजार में चीनी कंपनियों के शेयरों में तेज उछाल आया। बाजाज हिंदुस्तान शुगर, श्री रेणुका शुगर तथा धामपुर शुगर मिल्स के शेयरों ने 6–8% तक लाभ दिखाया; बलरामपुर चीनी, अवध शुगर, जुयरी इंडस्ट्रीज, द्वारिकेश शुगर और अन्य कागज पर भी दहाई के अंदर ऊँचा प्रदर्शन दर्ज हुआ।

विश्लेषकों ने कहा कि त्योहारी सीज़न (अगस्त‑नवंबर) में घरेलू मांग बढ़ने के साथ हाल की कीमतों में 10% तक की वृद्धि और आपूर्ति‑संबंधी चिंताएँ (अनियमित बारिश व गुड की पैदावार पर असर) मिलकर कीमतों को ऊँचा रख रही हैं। वैश्विक स्तर पर ब्राज़ील में कटाई और उत्पादन की अनिश्चितता तथा वहां गन्ने का बड़ा हिस्सा इथेनॉल के लिए जाने से भी आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है। बाजार पर प्रभाव का एक और पहलू यह है कि कुछ विश्लेषकों के अनुसार मिलों के पास जून में दर्ज बही‑मूल्य और वर्तमान बिक्री‑मूल्य के बीच बड़ा अंतर आया है, जिससे नियामकीय बदलाव शेयर वैल्यूएशन में परिलक्षित हो रहा है।

प्रशासन संभावित आयात शुल्क में कटौती पर विचार कर रहा है ताकि घरेलू आपूर्ति को बढ़ाकर कीमतों को नियंत्रित किया जा सके, इस पर अधिकारी परामर्श में हैं।

संदर्भ स्रोतEconomic Times LatestBusinessLineEconomic Times Markets
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