भारतीय आईटी सेवा उद्योग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से अपनाने ने ठेके और भुगतान मॉडलों को बदल दिया है। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, इंफोसिस, विप्रो, HCLTech और कॉग्निजेंट जैसी बड़ी कंपनियाँ अब पारंपरिक बिल करने के घंटों के बजाय प्रदर्शन‑आधारित शर्तों पर सौदे करने की ओर जा रही हैं।

उद्योग के कई उदाहरणों में ग्राहक‑दक्षता और लागत बचत के आधार पर भुगतान तय करने वाले समझौते सामने आए हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक़ कुछ अनुबंधों में AI से होने वाली लागत बचत को विक्रेता और ग्राहक के बीच बांटने की शर्तें रखी गईं, तथा दूसरे मामलों में पहले वर्ष के भुगतान को दक्षता‑लाभ से जोड़कर संरचित किया गया।

विशेषज्ञों और कंपनी अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि AI से उत्पादकता बढ़ने पर ग्राहकों की अपेक्षाएँ कड़ी हुई हैं: वे कम लागत पर तेज़ और बेहतर परिणाम चाहते हैं। इसी दबाव में कुछ काम क्लाइंट्स के इन‑हाउस हो जाने या छोटे और मध्यम कंपनियों के बीच तीव्र प्रतिस्पर्धा के कारण बड़े प्रदाताओं के पास नहीं रह रहे।

परिणामस्वरूप अनुबंध अवधि छोटी हो रही हैं और सेवा प्रदाताओं पर मुनाफ़ा‑दबाव बढ़ा है; बाज़ार की परिस्थितियाँ अब क्लाइंट‑अनुकूल होती जा रही हैं। उद्योग के कुल आकार और सूचकांकों में गिरावट के संकेतों का हवाला भी रिपोर्टों में दिया गया है।

यह रिपोर्ट उपलब्ध स्वतंत्र स्रोतों में प्रकाशित तथ्यों के आकलन पर आधारित है; किसी विशिष्ट निजी अनुबंध की विस्तृत शर्तों पर कंपनियों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ रिपोर्ट में शामिल नहीं की गईं।

संदर्भ स्रोतThe Hindu TechnologyThe Hindu Business
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