कृष्णोतर क्रम में यह कदम प्रधानमंत्री की घोषणा के तुरंत बाद लिया गया। केंद्र ने परीक्षा‑पत्र लीक मामलों में तेज़ मुकदमों के लिए फास्ट‑ट्रैक कोर्ट स्थापित करने की बात कही और उसी दिन दिल्ली हाईकोर्ट ने भी एक विशेष न्यायालय का निर्देश जारी किया।
हाईकोर्ट की अधिसूचना के अनुसार राउज़ एवेन्यू कोर्ट परिसर में एनी ग्रोवर बलीगा (Anu Grover Baliga) की अदालत को “स्पेशलली डिजाइनेटेड फास्ट ट्रैक कोर्ट” के रूप में नामित किया गया है। यह अदालत सार्वजनिक परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक और अनुचित साधन इस्तेमाल से संबंधित मामलों के तहत लाए गए आरोपों की सुनवाई करेगी।
अधिसूचना में बताई गई प्रक्रिया के अनुरूप यह विशेष अदालत उस 2024 के कानून — Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024 — के तहत दर्ज अपराधों तथा उनसे जुड़ी धाराओं की सुनवाई के दायरे में काम करेगी। नामांकन तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है, जैसा कि अधिसूचना में उल्लेख है।
सरकारी देयता और त्वरित निपटान की नीयत का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर निर्देश और आगे की कार्रवाई का संकेत दिया; सरकार ने छात्रों के हितों की रक्षा को प्राथमिकता बताया।
यह निर्णय व्यापक सार्वजनिक आक्रोश और छात्रों‑संगठनों के प्रदर्शन के बीच आया है, जिनका फोकस हालिया प्रतियोगी परीक्षा विवादों पर रहा है। दोनों पक्षों की प्रतिक्रिया और कानूनी प्रक्रिया के अगले चरण अब विशेष अदालत के गठन के बाद ध्यान का केन्द्र बने रहेंगे।
अभी यह स्पष्ट नहीं है कि विशेष कोर्ट में किस तरह से मामलों के निपटान की समयसीमा तय की जाएगी या किन प्रशासनिक व्यवस्थाओं के तहत कार्य होगा; हाईकोर्ट की अधिसूचना का परिचय और नामांकन ही वर्तमान में सार्वजनिक किया गया तथ्य है।