गुरुवार को राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर उठे दबाव के बीच दिल्ली उच्च न्यायालय ने सार्वजनिक परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक और अन्य अनुचित साधन से जुड़े आपराधिक मामलों को विशेष रूप से सुनने के लिए एक फास्ट‑ट्रैक अदालत नामित की। नोटिफिकेशन के अनुसार न्यायिक अधिकारी अनु ग्रोवर बालिगा के कोर्ट को यह विशेष पदभार सौंपा गया है और यह फैसला तुरंत प्रभाव से लागू हुआ।
यह कदम उस घोषणा के तुरन्त बाद आया जब केंद्र सरकार ने परीक्षा‑सम्बंधी अपराधों के त्वरित निपटान के लिए फास्ट‑ट्रैक अदालतें स्थापित करने का निर्णय सार्वजनिक किया। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर यह निर्देश दिए कि प्रश्नपत्र लीक में संलिप्तों के खिलाफ तेज़ और कड़े कार्रवाई के लिए आवश्यक कदम उठाये जाएँ और छात्रों के हितों की रक्षा प्राथमिकता होनी चाहिए।
नोटिफिकेशन में कहा गया है कि यह अदालत 2024 के 'Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act' के तहत आने वाले मामलों तथा इससे जुड़े अपराधों का एकांतरण करेगी। अदालत Rouse Avenue कोर्ट परिसर में स्थित होगी और इसके गठन से जुड़े प्रावधान तुरंत लागू कर दिए गए हैं।
यह विकास उन व्यापक छात्र प्रदर्शनों और सक्रिय समूहों की नाराजगी के बीच आया है जो राष्ट्रीय स्तर पर परीक्षा‑प्रणाली में अनियमितताओं और विशेषकर NEET‑UG के कथित पेपर लीक की घटनाओं के चलते सक्रिय हैं। इन प्रदर्शनों में छात्रों व नागरिक समूहों ने जवाबदेही और त्वरित सुनवाई की मांग उठाई थी।
विशेष अदालत के गठन से संबंधित नोटिफिकेशन और केंद्र की घोषणा दोनों स्रोतों में प्रकाशित की गई जानकारी मिलती है, जो यह दर्शाती है कि न्यायपालिका व केंद्र सरकार इस विषय पर शीघ्र कार्रवाई की दिशा में समन्वय बना रहे हैं। इस निर्णय का असर, लंबित केसों के स्थानांतरण तथा दोषियों के विरुद्ध संभावित त्वरित मुकदमों के रूप में दिखाई देगा, जबकि जांच व अभियोजन आगे जारी रहेगी।