दिल्ली उच्च न्यायालय ने 23 जुलाई को राऊज़ एवेन्यू कोर्ट परिसर में एक विशेष फास्ट‑ट्रैक अदालत नामित कर दी है, जिसका लक्ष्य सार्वजनिक परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक और अनुचित साधनों से जुड़े आपराधिक मामलों का शीघ्र निपटान करना है। न्यायालय की अधिसूचना के अनुसार इस विशेष अदालत का प्रभार न्यायिक अधिकारी अनु ग्रोवर बलिगा को सौंपा गया है।

अधिसूचना में कहा गया है कि यह विशेष अदालत सार्वजनिक परीक्षाओं (अन्यायिक साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत लगाए गए अपराधों तथा उनसे जुड़े अन्य अपराधों का परीक्षण करेगी। अधिसूचना के जारी होते ही उक्त अधिनियम के तहत पेंडिंग मामलों को इस अदालत में स्थानांतरित करने का प्रावधान है।

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नियुक्ति का यह कदम उसी दिन आया जब प्रधानमंत्री ने पेपर‑लीक मामलों के लिए फास्ट‑ट्रैक अदालतें स्थापित करने की सरकार की योजना की घोषणा की। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से कहा कि छात्रों के हितों की रक्षा प्राथमिकता है और पेपर लीक में शामिल लोगों के खिलाफ तेज सुनवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

यह विकास देशव्यापी छात्र आंदोलनों और प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध के बीच हुआ है; प्रदर्शनकारी विशेष रूप से NEET‑UG के कथित पेपर लीक घटनाक्रम को लेकर आवाज उठा रहे हैं। दिल्ली हाईकोर्ट की नामांकन अधिसूचना और केंद्र की घोषणा को अधिकारी त्वरित कानूनी कार्रवाई और परीक्षा प्रक्रियाओं में जवाबदेही की ओर एक कदम मान रहे हैं।

अधिनियम के तहत विशेष अदालत के गठन से जुड़े तकनीकी संचालन और सुचारु कार्यवाही के लिए आगे की व्यवस्थाओं तथा पेंडिंग मामलों के हस्तांतरण के विस्तृत आदेशों का पालन अदालत‑प्रशासन करेगा। सार्वजनिक और प्रशासनिक स्तर पर आगे की कार्रवाई से ही यह स्पष्ट होगा कि त्वरित ट्रायल का ढांचा कितनी तेजी से लागू होता है।

संदर्भ स्रोतHindustan Times DelhiThe Hindu DelhiTimes of India Delhi