हॉकी इंडिया ने आगामी FIH हॉकी वर्ल्ड कप (नीदरलैंड व बेल्जियम) के लिए राष्ट्रीय पुरुष व महिला टीमों की प्राथमिक खेल जर्सी नीले से सैफ्रन में बदलने की घोषणा सोशल मीडिया पर की। फेडरेशन ने यह कदम तकनीकी कारणों और रंग के प्रतीकात्मक अर्थ दोनों से जोड़ा।

HI ने कहा कि आधुनिक अंतरराष्ट्रीय मैचों में प्रयुक्त नीला सिंथेटिक पिच पारंपरिक नीली जर्सी के साथ मिलकर ऑन‑फील्ड दृश्य स्पष्टता प्रभावित करती है; इसी आधार पर कोच व खिलाड़ियों ने वैकल्पिक रंगों पर चर्चा की और सैफ्रन को अंतिम रूप दिया गया। इस तर्क को कई खेल समाचार संस्थानों ने रिपोर्ट किया।

घोषणा के तुरंत बाद पूर्व कप्तान व खेल कार्यकर्ता ने टीम की पारंपरिक नीली सज़ा के स्थानांतरण को पहचान और विरासत से जुड़ा मामला बताते हुए आलोचना की, जिस पर सार्वजनिक बहस छिड़ गयी। इसके बाद फेडरेशन ने विस्तृत बयान जारी कर निर्णयनिर्माण में खिलाड़ियों व सपोर्ट स्टाफ की भागीदारी, तकनीकी विचार और रंग के राष्ट्रध्वज‑संबंधी अर्थ (साहस, त्याग व राष्ट्रीय‑गौरव) की व्याख्या दोहराई।

जर्सी के डिज़ाइन में सांस्कृतिक प्रतीकों को शामिल करने की बात भी बताई गयी है: शरीर के मध्य में मंडला‑प्रेरित पैटर्न, छाती पर सुदर्शन चक्र से प्रेरित आधुनिक ग्राफिक, कंधों व पार्श्व पर तिरंगे‑पाइपिंग और 'INDIA' का देवनागरी‑शैली में लिखा होना — सभी को राष्ट्रीय पहचान और सांस्कृतिक विविधता के रूप में पेश किया गया है। फेडरेशन ने बताया कि गहरा नेवी‑ब्लू अक्सेंट अशोक चक्र से प्रेरित है।

HI ने यह भी कहा कि जर्सी रंग बदलना भारतीय हॉकी के लिए नया नहीं है; अतीत में विश्व कपों में पीला व स्काई‑ब्लू जैसे विकल्प अपनाए जा चुके हैं। फेडरेशन ने कहा कि टीमों के किट में श्वेत वैरिएंट भी होगा जो समान डिज़ाइन तत्व रखेगा।

यह परिवर्तन खेल‑तकनीक और पहचान‑बहस के बीच संतुलन का मुद्दा बन गया है: एक ओर ऑन‑फील्ड पढ़नीयता व खिलाड़ी‑सहयोग से लिया गया निर्णय, दूसरी ओर समर्थकों व पूर्व खिलाड़ियों की पारंपरिक रंग पहचान को लेकर चिंता।

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संदर्भ स्रोतIndian Express SportsThe Hindu SportTimes of India Sports
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