घटना का क्रम: 23 जुलाई को प्रधानमंत्री ने एक संदेश पहले इंस्टाग्राम पर अपलोड किया और बाद में उसे फेसबुक पर साझा किया गया। दोनों प्लेटफॉर्म पर साझा हुए क्लिप को फेसबुक पर कुछ समय के लिए उपलब्ध नहीं पाया गया, फिर कंपनी ने सामग्री बहाल कर दी।
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने इस अस्थायी प्रतिबंध के मद्देनजर Meta के उच्च स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों को फिर से तलब किया है। मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि कंपनी को उच्चतम स्तर पर बुलाकर स्पष्ट करना कहा गया है, हालांकि यह नहीं बताया गया कि किन कार्यपालक अधिकारियों को उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है।
Meta ने इस घटना को अनजाने में हुई गलती बताया और बताया कि हटाई गई सामग्री बहाल कर दी गई है। कंपनी ने साथ में यह भी कहा कि भविष्य में इसी तरह की घटनाओं को रोकने के लिये सार्वजनिक मुकाम पर रहने वाले खातों के लिए नए प्रोटोकॉल लागू किए गए हैं।
घटना की पृष्ठभूमि में वह संदेश है जो प्रधानमंत्री ने छात्र आंदोलनों और कथित NEET पेपर लीक की पृष्ठभूमि में दिया था; इस संबोधन को सरकार के कार्रवाई के संदर्भ में तथा तब के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद देखा जा रहा है। इंस्टाग्राम पर यह वीडियो व्यापक रूप से देखा गया और रिपोर्ट्स के अनुसार उसके व्यूज 404 मिलियन से ऊपर जा चुके हैं।
सरकार ने इसी मुद्दे पर पहले भी Meta के वैश्विक पब्लिक पॉलिसी प्रमुख को तलब कर जवाब मांगा था, और यह नया समन उसी निगरानी के दायरे में आता है जहाँ सार्वजनिक अधिकारियों से संबंधित कंटेंट मॉडरेशन पर बड़ी तकनीकी कंपनियों की जवाबदेही पर ध्यान दिया जा रहा है।
रिपोर्टिंग एजेंसियों को Meta India की ओर से तुरंत टिप्पणी नहीं मिली। मंत्रालय ने कंपनी से स्पष्टीकरण और दोहराव रोकने के उपायों की विस्तृत जानकारी मांगी है।

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