दिल्ली सरकार ने महिलाओं को प्रतिमाह वित्तीय सहायता देने वाले नए कार्यक्रम — ‘लक्ष्मी योजना’ — के पंजीकरण और क्रियान्वयन के लिए सत्यापन प्रक्रिया की रूपरेखा तैयार की है। प्रशासन योजना के दौरान यादृच्छिक रूप से घर-घर जाकर पंजीकृत आवेदिकाओं की पात्रता जाँचने पर सहमति बना रहा है।
सरकारी रूपरेखा के अनुसार, लाभार्थियों को हर माह 2,500 रुपये दिए जाने का प्रावधान है और सत्यापन में आवेदक की दिल्ली निवासी/मतदाता स्थिति, आय सीमा, आयकर दायित्व, आयु सीमा और अन्य किसी केंद्र/राज्य सहायता के लाभार्थी न होने जैसे मानदण्डों की जाँच शामिल होगी। योजना में यह भी देखा जाएगा कि किसी आवेदिका के तीन से अधिक जीवित बच्चे तो नहीं हैं—यह तीन-जीवित-बच्चों की सीमा इस योजना में नई अपवर्जन शर्त है।
महिला एवं बाल विकास विभाग (WCD) ने बाहरी एजेंसी के माध्यम से रैंडम सत्यापन कराने की संभावना जताई है ताकि चयनित लाभार्थियों की जाँच पारदर्शी और प्रभावी हो सके। सरकारी दस्तावेजों के अनुसार योजना के क्रियान्वयन में महिलाओं के स्वास्थ्य व आर्थिक निर्णय-क्षमता को ध्यान में रखा जाना बताया गया है।
कार्यक्रम कैबिनेट की मंजूरी के बाद लागू होगा और शुरुआत तीन वर्षों के लिए प्रस्तावित है; इसके बाद आवश्यकतानुसार संशोधन किये जा सकते हैं। पंजीकरण के लिए एक पोर्टल 1 अगस्त से चालू होने की जानकारी दी गई है और पहली किस्त का वितरण रक्षाबंधन के अवसर पर शुरू करने का एजेंडा रखा गया है।
सरकार ने योजना को दो विकल्पों वाले वित्तीय ढांचे के रूप में बताया है: एक विकल्प में पूर्ण राशि निवेश कर तीन वर्षों के बाद एकल भुगतान लेने का विकल्प और दूसरे में आंशिक निवेश कर शेष राशि डिजिटल कार्ड से खर्च करने का विकल्प प्रस्तावित है। अधिकारी यह भी कहते हैं कि इन प्रावधानों से महिलाओं को अपनी आय पर स्वतंत्र नियंत्रण हासिल करने में सहायता मिलेगी।

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