हॉकी इंडिया ने राष्ट्रीय टीम की जर्सी का रंग पारंपरिक नीले से साफ़रन करने का फैसला किया, जिसके बाद संघ के भीतर प्रक्रिया और निर्णय‑स्वामित्व को लेकर विवाद सतह पर आया। फेडरेशन की शीर्ष नेतृत्व संरचना में यह मसला ईमेल के ज़रिये उठाया गया और इसके तुरंत बाद प्रशासन ने लिखित नोट के माध्यम से निर्णय की वजहें बताईं।

संघ के अध्यक्ष ने कार्यकारिणी बोर्ड को भेजे ईमेल में कहा कि रंग परिवर्तन का फैसला बोर्ड के समक्ष नहीं रखा गया और उन्हें पहले से सूचित नहीं किया गया था; उन्होंने निर्णय‑प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी देने का निर्देश दिया। कार्यकारी निदेशक ने जवाब में चार-पृष्ठ का नोट तैयार किया और इसमें बदलाव को तकनीकी व प्रदर्शन कारणों से जोड़ा गया, यह बताते हुए कि साफ़रन आधुनिक नीले पिच पर दृश्य अलगाव बेहतर कर सकता है और कोचों व वरिष्ठ खिलाड़ियों के फीडबैक पर आधारित है।

फेडरेशन के एक उपाध्यक्ष ने भी निर्णय के पारदर्शी एवं जवाबदेही वाले तरीके पर सवाल उठाए और कहा कि इस तरह के बदलावों के लिए बोर्ड की मंजूरी जरूरी होनी चाहिए। इसी बीच अध्यक्ष ने ओडिशा सरकार द्वारा उनसे स्पष्टीकरण की मांग होने की बात का जिक्र किया और संबंधित जानकारी साझा करने का अनुरोध किया।

यह विवाद उस समय उठा है जब हॉकी इंडिया पहले से ही गवर्नेंस संबंधी जाँच के दबाव में है: महासचिव के खिलाफ लगाए गए दावों और एक पूर्व कप्तान द्वारा उठाए गए शिकायत प्रबंधन के सवालों पर मंत्रालय ने आंतरिक शिकायत समिति के समक्ष मामला रखने तथा स्वतंत्र जाँच कराने के निर्देश दिए हैं।

गतिविधियां अभी प्रगति पर हैं: फेडरेशन के भीतर किस तरह के औपचारिक प्रक्रियात्मक कदम आगामी दिनों में होंगे और बोर्ड किस रूप में इस मतभेद का निपटारा करेगा, यह तय होना बाकी है।

संदर्भ स्रोतTimes of India SportsTimes of India Top Stories
पाठकों की राय

टिप्पणियां 0

सभ्य और विषय से जुड़ी भाषा का प्रयोग करें।