Manushi Chhillar ने हालिया सार्वजनिक बातचीत में बताया कि 2015 के NEET पेपर लीक के बाद उन्हें परीक्षा दोबारा देनी पड़ी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह व्यक्तिगत रूप से कठिन दौर था, क्योंकि उस अवधि के लिए उन्होंने अपनी कुछ क्रिएटिव और शारीरिक गतिविधियों को रोक दिया।
उन्होंने यह भी कहा कि जब उन्हें बताया गया कि मौजूदा तैयारी के बाद भी उन्हें और करीब 45 दिनों तक तैयारी जारी रखनी होगी, तो यह मानसिक और शैक्षिक दबाव और बढ़ गया। उस समय उनके माता‑पिता ने रोज़ एक घंटे व्यायाम ज़रूरी कर दिया, जिससे उन्हें बाहर का सामाजिक संपर्क और मानसिक राहत मिली।
Manushi ने बातचीत में यह स्वीकार किया कि उनके पास पारिवारिक समर्थन और संसाधन थे, जो कई अन्य उम्मीदवारों को उपलब्ध नहीं होते। उन्होंने बताया कि उन्होंने कुछ साथियों से मिले जिनके परिवार ने कोचिंग के लिए उधार लिया था, कुछ छात्र अलग शहरों में पढ़ाई करने गए और कई छोटे‑छोटे पीजी आवासों में रहते हुए पूरी तरह तैयारी के लिए समर्पित हो गए थे।
उनकी यह बातें देशव्यापी छात्र विरोधों और परीक्षाओं की विश्वसनीयता को लेकर उठे सवालों के समय आईं; दोनों रिपोर्टों में यह उल्लेख है कि हाल की छात्र आंदोलनों के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पद छोड़ा।
Manushi का बयान इस व्यापक परिप्रेक्ष्य में सामने आया जिसमें व्यक्तिगत अनुभव और उन चुनौतियों का ब्यौरा था जिनका सामना कई प्रवेश‑परीक्षा उम्मीदवार करते हैं — तैयारी की तीव्रता, पारिवारिक बलिदान और मानसिक स्वास्थ्य के लिए छोटे‑छोटे उपाय।

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