1998 के उस गीत की पहचान पर अपनी आपत्ति जताते हुए संगीतकार जतिन पंडित ने हालिया रीक्रिएटेड वर्जन पर कड़ी टिप्पणियाँ दी हैं। पंडित ने कहा है कि यह नया संसकरण मूल रचना की आत्मा और लय-भावना को बदल देता है।

उनका यह रिएक्शन उस रिलीज़ के बाद आया है जो नई पीढ़ी के बीच तेजी से वायरल हुआ। पंडित ने यह भी बताया कि रीमिक्स के चुने हुए अरेंजमेंट और प्रदर्शन ने गाने की मूल सादगी और मध्यम लय को प्रभावित किया है। उन्होंने यह महसूस किया कि रीक्रिएशन में ताल और मूवमेंट को तेज करने से गीत की मूल पहचान प्रभावित हुई।

संगीतकार ने परफॉर्मरों की तकनीकी और नृत्य क्षमता की सराहना करते हुए कहा कि परफॉरमेंस में कलाकारों ने अच्छा काम किया। फिर भी उनकी चिंता यह रही कि नृत्य और बॉडी मूवमेंट कभी-कभी संगीत की बारीकी और भावनात्मक सूक्ष्मता से अधिक मुखर दिखे।

विस्तृत टिप्पणी में पंडित ने यह संकेत दिया कि जब किसी मौलिक रचना में नए तत्व जोड़े जाते हैं तो उसके समग्र स्वरूप पर असर पड़ता है; उन्होंने रीमिक्स में जो नई शैलियाँ और अरेंजिंग आईं उन्हें इसी संदर्भ में जानचा। साथ ही उन्होंने यह माना कि रीक्रिएटेड ट्रैक ने युवा श्रोताओं तक पहुँच बनाई।

मामले का कैनवास यही दिखाता है कि पुराने गीतों के रीक्रिएशनों पर सांस्कृतिक और संगीतकारों के दृष्टिकोण से संवेदनशील बहस रहती है: एक ओर मौलिकता और भावनात्मक संपूर्णता की रक्षा, दूसरी ओर नए रूप और दर्शक जुड़ाव। पंडित की प्रतिक्रिया ने इस बहस को फिर से सार्वजनिक मंच पर ला दिया है।

संदर्भ स्रोतNDTV EntertainmentTimes of India Entertainment
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