अमेरिका के राष्ट्रपति ने अगस्त की शुरुआत में नए हमलों को फिलहाल न करने का निर्णय लिया और उससे पहले प्रशासन ने युद्धविराम-सम्भावना पर जारी प्रयासों का हवाला दिया। अमेरिकी नेतृत्व की घोषणा के मुताबिक कुछ मध्यस्थ और गल्फ के राजनयिकों की गुहार ने इस निर्णय को प्रभावित किया।
विभिन्न प्रकाशनों के अनुसार ट्रम्प ने कहा कि गल्फ के साथी देशों — जिनमें सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात का जिक्र आया — ने हमलों को टालने का आग्रह किया और कुछ पक्षों ने युद्धविराम के “परिमाप” (perimeters) तय होने का संकेत दिया। इसी बीच व्हाइट हाउस ने अधिक समय देकर कूटनीति को आगे बढ़ाने का इरादा जताया।
इसी समय तेहरान ने सीधे तौर पर कहा कि वह अमेरिका के साथ कोई वार्ता नहीं कर रहा और ओमान के साथ स्ट्रेट ऑफ हर्मुज़ से जुड़ी नौवहन व्यवस्था पर चर्चा कर रहा है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने संवादों का स्वरूप ओमान से जुड़ा बताया और अमेरिका के साथ सीधे बातचीत होने की बात से इन्कार किया।
सूत्रों की रिपोर्टों से यह भी स्पष्ट हुआ कि प्रशासन ने युद्ध के विकल्पों पर पहले तीव्र सैन्य कदमों का विकल्प रखा था और एक उच्च स्तरीय हमले की रूपरेखा भी बनी थी; बाद में इसे टाला गया ताकि मध्यस्थता को अवसर दिया जा सके। यह इससे पहले भी देखा गया है कि नई कार्रवाई को टालने और फिर स्थिति में तेज़ी दोनों—इसी प्रकार के कई मोड़—कुछ महीनों से बार-बार देखे गए हैं।
रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि मध्यस्थों के एक प्रस्ताव में नहर के पुनः खुलने, क्षेत्रीय हमलों में कमी (जिसमें कुछ ईरानी-समर्थित मिलिशिया शामिल बताए गए हैं) और पारस्परिक प्रतिबंधों में शिथिलता जैसी बातें शामिल हैं। साथ ही अमेरिका ने नौसैनिक प्रतिबंधों और तेल-निर्यात से जुड़ी कुछ शर्तों पर वार्ता की संभावनाएँ भी बताई गई हैं।
अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय पहलें फिलहाल चल रही हैं और सार्वजनिक बयान सीमित हैं; कई विवरण अभी भी मध्यस्थों और सरकारों के बीच शेष हैं। घटनाक्रम ने यह संकेत दिया है कि तत्पर सैन्य कार्रवाई और कूटनीतिक खींचतान दोनों एक साथ चलते रहे हैं, और अगला कदम इस बात पर निर्भर करेगा कि मध्यस्थता से कितना जल्दी ठोस समझौता निकलता है।

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