जापान और संयुक्त राज्य अमेरिका ने पिछली सप्ताह के आखिर में एक साथ येन खरीदने का असामान्य कदम उठाकर मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप किया, दोनों सरकारों ने यह कार्रवाई सार्वजनिक रूप से स्वीकार की। आधिकारिक पुष्टि के बाद एशिया में विदेशी मुद्रा बाजारों में येन मजबूत हुआ और डॉलर कमजोर रह गया।
बैंक ऑफ़ जापान के आंकड़ों और जापानी वित्त मंत्रालय की सार्वजनिक झलकियों के अनुसार, टोक्यो ने गुरुवार के कारोबार में न्यूयॉर्क सत्र में डॉलर बेचे और करीब 58.97–59 अरब डॉलर के समकक्ष येन खरीदने का संकेत मिला। इसके तुरंत बाद शुक्रवार को जापानी और अमेरिकी अधिकारियों ने संयुक्त रूप से हस्तक्षेप करने की पुष्टि की।
अमेरिकी खजाना विभाग के शीर्ष अफसरों ने भी भागीदारी और भविष्य में फिर से हस्तक्षेप करने की तत्परता जाहिर की, जबकि व्हाईट हाउस की टिप्पणी ने कहा कि सहमति मित्र देश की सहायता के रूप में देखी जा सकती है। दोनों ओर की पुष्टि के सहयोग से बाजारों में एक अस्थायी सुधार आया; मुद्रा जोड़ी में येन की मजबूती दर्ज की गई और डॉलर कुछ स्थानों पर नीचे आया।
यह संयुक्त हस्तक्षेप 2011 के बाद से सबसे दुर्लभ द्विपक्षीय कार्रवाई मानी जा रही है। उस साल भी अमेरिका और जापान ने बाजारों में समन्वय किया था, लेकिन तब का मकसद अलग आर्थिक और आपात स्थिति से जुड़ा था।
निजी और सार्वजनिक विश्लेषक इस बात पर सतर्क हैं कि इस तरह की हस्तक्षेप-घटनाओं का दीर्घकालिक प्रभाव सीमित रह सकता है। विशेषज्ञों ने कहा है कि ब्याज दरों में जापान-अमेरिका के बड़े अंतर, ऊर्जा आयात और जनसंख्या व उत्पादकता से जुड़ी संरचनात्मक चुनौतियाँ येन की कमजोरी के मूल कारण बने हुए हैं, जिनके विरुद्ध एक या दो बार की हस्तक्षेप कार्रवाई पूरी तरह स्थायी सुधार नहीं दे सकती।
बैंक ऑफ़ जापान ने जून में अपनी नीति दर 1% तक बढ़ाई थी, जो दशकों में उच्चतर स्तर बताया गया; इसी पृष्ठभूमि में सरकार और केंद्रीय बैंक की नीतिगत कार्रवाइयाँ एक-दूसरे से तालमेल बनाकर चल रही हैं। बाजारों और नीति निर्माताओं की नजरें अब आगे संभावित अतिरिक्त समन्वय या मौद्रिक परिवर्तन पर टिक गई हैं।

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