Rashtriya Swayamsevak Sangh के सरसंघचालक मोहन भागवत ने 6 अगस्त 2026 को मुंबई में India’s International Movement to Unite Nations (IIMUN) के 15वें समारोह में Gen Z और Gen Alpha के प्रतिनिधियों से सीधा संवाद किया। मंच पर उन्होंने युवा मंचों पर उठ रहे विरोधों को लोकतांत्रिक संवाद की वैध पद्धति बताया और कहा कि युवाओं की शिकायतें वास्तविक हैं जिन्हें सुलझाने की आवश्यकता है।
भागवत ने स्पष्ट किया कि युवा‑विरोध को स्वचालित रूप से 'देशविरोधी' टैग से नहीं जोड़ा जाना चाहिए और उन्होंने आज की पीढ़ी पर भरोसा जताया, जबकि हालिया पुलिस–प्रदर्शन मामलों पर उन्होंने कहा कि पूरा तथ्य‑परिस्थिति सामने आए बिना निर्णायक टिप्पणी नहीं की जा सकती।
सामाजिक मुद्दों पर उनके रुख में परिवर्तनशीलता और सावधानी दोनों दिखाई दी। उन्होंने LGBTQ समुदाय को समाज का हिस्सा बताकर कहा कि उसे समायोजित करने का प्रावधान होना चाहिए, लेकिन वही स्वर यह भी था कि विवाह‑संस्था को बदलने के बजाय समलैंगिक साथियों के सहवास के लिए अलग कानूनी ढाँचे पर विचार किया जाना चाहिए।
शिक्षा और डिजिटल मीडिया को लेकर भागवत ने कहा कि शिक्षा को वाणिज्यिक कारोबार नहीं बनाया जाना चाहिए और उसका ढाँचा सबके लिए सुलभ होना चाहिए; साथ ही सोशल मीडिया पर गलत जानकारी रोकने के लिए केवल कानून पर्याप्त नहीं है, सामाजिक रुझान और रोल‑मॉडल बदलने होंगे।
विदेशनीति के मसलों पर उन्होंने नागरिक स्तर पर पैतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को बनाए रखने की वकालत की, यह कहते हुए कि संघर्ष के समय कदम अलग होंगे पर सतत् वैमनस्य स्थायी समाधान नहीं है।
कार्यक्रम में पूछे गए प्रश्नों की श्रेणियों में शिक्षा, रोजगार, जलवायु, महिला सशक्तिकरण और भारत के पड़ोसी संबंध जैसे विषय शामिल थे; भागवत ने जन‑विचार के लिए संवाद और सहमति की आवश्यकता पर कई बार ज़ोर दिया।
समग्र रूप से उनके वक्तव्य ने यह संकेत दिया कि RSS नेतृत्व कुछ मुद्दों पर परिष्कृत कदमों की गुंजाइश स्वीकार कर रहा है, जबकि साथ ही युवा प्रश्नों को बातचीत का विषय बनाए रखने पर जोर दिया गया।

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