आर. माधवन ने अपने बेटे वेदांत की परवरिश को लेकर वह सोच साझा की है जिसमें विशेषाधिकार और माता‑पिता की जिम्मेदारियाँ बराबर विचार का विषय हैं। अपने अनुभव का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि वेदांत को पांच वर्ष की आयु से ही बड़े की तरह माना गया और उसे घर के निर्णयों में शामिल किया गया।
माधवन ने यह भी कहा कि वेदांत आज 20 वर्ष के हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फ्रीस्टाइल तैराकी में राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। परिवार ने उसे अनुशासन और नियमित दिनचर्या पर टिके रहने के लिए प्रोत्साहित किया; घर पर उसकी आदतें सुबह‑देर से उठने की नहीं बल्कि अनुशासन वाली नींद‑जागरण रूटीन की ओर झुकती हैं — सोने का समय रात आठ बजे और सुबह चार बजे उठना इस बात का उदाहरण बताया गया।
अभिनेता ने स्वीकार किया कि वेदांत को मिलने वाला कुछ ध्यान 'प्रतिबिंबित कीर्ति' की तरह है — यानी उसके माता‑पिता की पहचान से जुड़ा होता है — और इसे लेकर सतर्क रहने की आवश्यकता है। साथ ही उन्होंने यह माना कि देश में कई तैराक ऐसे हैं जिनको अधिक समर्थन की जरूरत है और जिनकी प्रगति पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
आगामी ओलिंपिक के संदर्भ में माधवन ने कहा कि वेदांत अभी लक्ष्य‑स्तर से दूरी पर हैं और इसलिए परिवार और कोचिंग स्टाफ मिलकर विज्ञान और तकनीक के तरीकों की तलाश कर रहे हैं जिनसे वह अंतरराष्ट्रीय मानकों तक पहुँच सके। इस चर्चा के हिस्से के रूप में वे यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि कहां माता‑पिता का हस्तक्षेप छात्रों की मदद करेगा और कब उसे स्वायत्त रूप से विकसित होने देना चाहिए।
निजी जीवन की पृष्ठभूमि के तौर पर बताया गया कि माधवन ने 1999 में सरिता बिरजे से विवाह किया और वेदांत का जन्म 2005 में हुआ। काम के मोर्चे पर माधवन आख़िरी बार बायोपिक फिल्म GDN में दिखाई दिए, जिसमें उन्होंने आविष्कारक जी.डी. नायडु की भूमिका निभाई और फिल्म क्रिश्नकुमार रामकुमार द्वारा निर्देशित है।

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