बुधवार और गुरुवार को दिल्ली और संसद दोनों स्थानों पर छात्रों और विपक्ष के बीच तनाव जगा रहा। बुधवार को 13 छात्र और युवा संगठनों ने जंतर मंतर पर दो घंटे का विरोध प्रदर्शन किया; वे पुलिस की कथित कड़ी कार्रवाई और राज्यों में छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। आयोजन में CJP के कई सहभागी और AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष शामिल रहीं, तथा आयोजकों ने गिरफ्तारी और सोशल मीडिया पर नोटिस जारी करने का आरोप लगाया। (The Hindu, Indian Express)
उसी दिन दिल्ली पुलिस ने जंतर मंतर को बंद करने या प्रदर्शन पर रोक लगाने के सामाजिक-मैीडिया दावों को खारिज किया और बताया कि यह स्थान शांतिपूर्ण अनुमोदित प्रदर्शन के लिये खुले हैं, साथ ही सर्वोच्च न्यायालय के आदेश और SOP के अनुरूप अधिकतम 1,000 लोगों की सीमा लागू रहती है। पुलिस ने अनुमति प्रक्रिया और सोशल-मीडिया पर अविश्वसनीय जानकारी न फैलाने की सलाह दी। (Times of India, The Hindu)
पुलिस ने घटना की संभावना के मद्देनजर जंतर मंतर पर सुरक्षा कड़ी कर दी है; स्थान पर वेल्ड की गई बैरिकेड लगाई गईं और रैपिड एक्शन फोर्स समेत अतिरिक्त बल तैनात किए गए। CJP ने अगर आरोपों का निवारण न हुआ तो फिर से व्यापक आंदोलन की चेतावनी भी दी। (Indian Express, The Hindu)
इस बीच राज्यसभा के मॉनसून सत्र में विपक्ष ने Jantar Mantar पर हुई पुलिस कार्रवाई पर गृह मंत्री अमित शाह को सदन में हाजिर होकर जवाब देने का आग्रह किया; विपक्षियों ने सदन में नारेबाजी की और बाद में वॉकआउट किया। राज्यसभा में सरकार ने बिलों की कार्रवाई जारी रखी और नेता की सुनवाई पर बहस देखी गई। (Indian Express, Times of India)
स्थिति पर स्वतंत्र जांच की मांग, गिरफ्तारी व FIR वापसी की माँगें और भविष्य में नये आंदोलन की चेतावनी दोनों ओर से जारी रहीं।

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