सेंट्रल सेक्रेटेरिएट क्लब (पूर्व में टॉकटोरा क्लब), जो 1919 से दिल्ली के पार्क स्ट्रीट के पास संचालित है और केंद्रीय सेवा में तैनात व सेवानिवृत्त सरकारी कर्मियों के लिए समर्पित है, ने केंद्र सरकार द्वारा उसकी मान्यता रद्द करने और परिसरों से बेदखल करने के आदेशों को दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। याचिका में क्लब ने कहा कि फरवरी में डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनेल एंड ट्रेनिंग (DoPT) ने मान्यता हटाई और 17 जुलाई को एस्टेट ऑफिसर ने भवन खाली करने का निर्देश दिया। क्लब ने क्रमशः 14 जुलाई तथा 17 जुलाई के आदेशों को मनमाना, अलोकतान्त्रिक और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन करार दिया और आदेशों पर अस्थायी रोक (status quo) की मांग की।

बेंच ने याचिका पर आवेदन को सुनते हुए तत्काल स्टेटस कॉउ का आदेश नहीं दिया लेकिन याचिका पर केन्द्र सरकार को नोटिस जारी कर लिखित जवाब दाखिल करने को कहा; अगली सुनवाई 24 अगस्त को निर्धारित की गई है। न्यायमूर्ति स्वरना कांता शर्मा ने पक्षकारों को सुनने के बाद केंद्र से संक्षिप्त जवाब तलब किया। क्लब ने अदालत में दावा किया कि अघोषित नोटिस के बिना पास किया गया प्रारंभिक रद्दीकरण और उसके बाद दिया गया आदेश विधिसंगत नहीं था तथा वह 'दुराचरण' और प्रशासनिक शक्तियों के दुरुपयोग का परिणाम है।

केंद्र की ओर से अब मामले में लिखित जवाब दाखिल होगा; अदालत ने फिलहाल परिसरों पर कब्जा करने संबंधी आधिकारिक आदेशों पर स्वतः रोक नहीं लगाई। अगली सुनवाई 24 अगस्त को होगी।

संदर्भ स्रोतHindustan Times DelhiThe Hindu Delhi
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