दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को दिल्ली सरकार द्वारा ‘‘Delhi Lakshmi Yojana’’ के तहत मासिक ₹2,500 लाभ के लिए स्थानीय सांसद/विधायक की अनुशंसा-पत्र (endorsement) को अनिवार्य करने के फैसले पर तेज़ी से सवाल उठाए। चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारोया की पीठ ने इंगित किया कि यह दस्तावेज़ स्कीम की प्रकाशित पात्रता शर्तों में नहीं है और वैकल्पिक दस्तावेजों से पात्रता सत्यापित की जा सकती है।
पीठ ने तर्क किया कि endorsement का ज़रूरी होना उन महिलाओं की आवेदना अवरुद्ध कर सकता है जो अपने क्षेत्रीय सांसद/विधायक से सिफारिश हासिल नहीं कर पातीं, और इस तरह सुविधा राजनीतिक द्वारपालों के अधीन हो जाएगी। अदालत ने सरकार के वकील से इस आवश्यकता पर निर्देश पूछने को कहा और आगे की सुनवाई के लिए मामला सूचीबद्ध कर दिया।
यह याचिका पूर्व पार्षद अभिषेक दत्त और पार्षद वेदपाल शीटाल चौधरी द्वारा दायर पीआईएल से जुड़ी है, जिसमें endorsement की अनिवार्यता के साथ-साथ तीन-बच्चों की सीमा और दस साल के निवास मानदंड पर भी आपत्तियाँ शामिल हैं। सरकारी अधिसूचना के अनुसार योजना के लिए आय, वोटर-रजिस्ट्रेशन, बिजली उपभोग और अन्य शर्तें निर्धारित की गई हैं; सरकार ने लाभ पत्रों का वितरण और राशि के वितरण-तंत्र की रूपरेखा भी तय की है। अदालत ने कहा कि पात्रता का आकलन कागजात के माध्यम से किया जा सकता है और endorsement का दबाव स्वीकार्य नहीं दिखता।

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