केंद्र ने अगस्त 2026 में मास्टर प्लान दिल्ली‑2047 (MPD‑2047) को अधिसूचित कर राजधानी के भूमि उपयोग व निर्माण नियमों में व्यापक बदलाव लागू किए। योजना का लक्ष्य लगभग 40‑43 लाख नए आवास यूनिट तैयार करना है, जिनमें मुख्य जोर सस्ती और परिवहन‑आधारित आवास पर रखा गया है।
योजना में अधिकतम ऊँचाई पर किए गए व्यापक रूक‑रोक हटाई गई हैं और ‘‘ट्रांसपोर्ट‑ओरिएंटेड डेवलपमेंट’’ (TOD) वाले क्षेत्रों में उच्च FAR (कभी‑कभी 500 तक) और घनत्व को अनुमति दी गई है; इसके तहत मेट्रो, RRTS और रेलवे स्टेशनों के आसपास 500 मीटर के दायरे में उच्च‑घनत्व विकास को प्रोत्साहित किया जाएगा।
MPD‑2047 सीमित क्षेत्रों (जैसे लुट्येन्स बंगलो ज़ोन, रिज, यमुना तलाव आदि) को छोड़कर अक्सर ऊँचाई प्रतिबंधों को हटाती है और समूह‑हाउसिंग तथा पुराने इलाकों के पुनर्विकास के लिए न्यूनतम भू‑आकार की आवश्यकताओं को घटाती है। लैंड‑पूलिंग के माध्यम से लगभग 200 वर्ग किमी की योजनाबद्ध शहरी विस्तार भूमि और लगभग 600 किमी सड़क नेटवर्क विकसित करने की रूपरेखा दी गई है।
योजना में झुग्गी‑झोंपड़ी पुनर्वास और इन‑सिचू पुनर्वास को वित्तीय प्रोत्साहन दिए गए हैं जिनमें डेवलपर्स के लिए अधिक लाभांश रखने के विकल्प शामिल हैं। उच्च‑घनत्व कॉरिडोर्स, खासकर Urban Extension Road‑II के दोनों ओर, बड़े पैमाने पर हाई‑राइज़ विकास के लिये चिन्हित हैं।
सामान्य इन्फ्रास्ट्रक्चर, सार्वजनिक प्लाज़ा और खुली जगहों को बढ़ावा देने के निर्देश दिये गये हैं; साथ ही नई आर्थिक गतिविधियाँ—डेटा सेंटर, इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल पार्क और स्टार्ट‑अप‑हब—को भी मान्यता मिली है। योजना में भविष्य के परिवहन विकल्पों का उल्लेख भी है, जिसमें एयर‑टैक्सी/एयर‑पॉड जैसे औसत दीर्घकालीन तकनीकी विकल्पों का संकेत दिया गया है।
नोटिफिकेशन के बाद विपणन व निवेश समुदाय ने इसे भयोजक अवसर के रूप में देखा है, जबकि नियोजन में विरासत क्षेत्रों, दृश्य‑corridor और सार्वजनिक स्थानों के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान देने की शर्त सुनाई गई है।

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