वाशिंगटन ने अगस्त के तीसरे सप्ताह में ईरान के खिलाफ एक बड़े पैमाने पर आर्थिक अभियान की रूपरेखा सार्वजनिक की। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इसे "सबसे भयंकर" आर्थिक ऑपरेशन करार देते हुए कहा कि वे ईरान को आर्थिक रूप से अलग कर देंगे, और किसी भी देश को चेतावनी दी जो तेहरान के साथ आर्थिक लेन‑देन जारी रखेगा। (Indian Express, The Hindu)

अमेरिकी वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट ने पत्रकारों से कहा कि यह अभियान व्यापक सहयोग पर निर्भर करेगा और कि अमेरिका सहयोगियों और प्रतिद्वंद्वियों दोनों से समर्थन की उम्मीद कर रहा है; उन्होंने चीन पर भी निजी तौर पर दबाव डालने की बात कही और बताया कि अधिक विवरण आने वाले दिनों में साझा किए जाएंगे। (The Hindu, NDTV)

ईरानी विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी घोषणा की निंदा की, उसे "आर्थिक आतंकवाद" और अमेरिका की आंतरिक आर्थिक समस्याओं से ध्यान हटाने का प्रयास बताया। मंत्रालय के बयान और ईरानी विदेश मंत्री के सोशल पोस्ट को सार्वजनिक रूप से रिपोर्ट किया गया है। (Indian Express, The Hindu)

अमेरिकी नीति के इस मोड़ को कुछ विश्लेषकों ने युद्ध की बजाय आर्थिक दबाव पर ज़ोर देने की रणनीति बताया; अमेरिका ने संकेत दिए कि अधिकतम आर्थिक दबाव से बड़े सैन्य अभियान की आवश्यकता कम हो सकती है। (The Hindu, NDTV)

अमेरिकी राष्ट्रपति की घोषणा ने वैश्विक व्यापार और ऊर्जा मार्गों पर चिंता बढ़ा दी है क्योंकि ईरान के तेल निर्यात और शैडो टैंकर फ़्लीट को पहले भी विविध प्रतिबंधों के बावजूद विदेशी खरीददारों से जुड़ा देखा गया है। (The Hindu, Indian Express)

अमेरिका की यह पहल सितंबर में चीनी राष्ट्रपति के व्हाइट हाउस दौरे से पहले वैश्विक कूटनीति में तनाव बढ़ाने वाली मानी जा रही है; अमेरिकी नेतृत्व का कहा है कि देशें या तो उनके साथ होंगे या नहीं — इस बयान ने कई राजनयिक केंद्रों में चर्चा बढ़ा दी है। (The Hindu, Indian Express)

संदर्भ स्रोतThe Hindu WorldNDTV WorldNDTV LatestIndian Express World
पाठकों की राय

टिप्पणियां 0

सभ्य और विषय से जुड़ी भाषा का प्रयोग करें।