एक तरफ युवाओं का गुस्सा दूसरी ओर एथेनॉल का सिरदर्द
देश में एथनाल को लेकर काफी समस्याएं जनता को झेलनी पड़ रही हैं। जहां वाहनों को एवरेज की मार झेलनी पड़ रही है दूसरी ओर नयी कारों में इंजन खराब होने की शिकायते आ रही हैं। पहले देश में एथनाल प्रोडक्शन में गन्ने का इस्तेमाल यह कर किया गया कि गन्ने का भारत में काफी उत्पादन है। उसके बाई प्रोडक्ट मोलेसिस से एथनाल बनाया जा रहा है। इस वजह से देश में गन्ने के उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा एथनॉल बनाने में हुआ। पिछले एक साल से गन्ने से चीनी का उत्पादन प्रभावित हुआ। पिछले 10 सालों से भारत चीनी और मक्के का निर्यात कर रहा था। लेकिन इस चीनी और मक्के का आयात करना पड़ रहा है। देश में चीनी के दाम आसमान छू रहे हैं और सत्ता धारी नेता और मंत्री ऊल जुलूल बयान दे कर जनता के घावों पर नमक छिड़कने का काम कर रहे हैं। देश में चीनी के दाम भी 75 रुपये किलो पहुंच गये हैं। दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ सरकार यह कह रही है कि देश में चीनी का भरपूर स्टॉक है तो चीनी के दाम 42 से बढ़कर 75 रुपये तक कैसे पहुंच गये हैं।
मुर्गी के अंडो के दामों में आग क्यों लगी
ये देखा जा रहा है कि पिछले एक साल से अंडों के दामों में 40 प्रतिशत की बढोतरी हुई है। एक रिपोर्ट के अनुसार मक्का के दामों में भारी इजाफा हुआ कारण यह है कि उत्पादन में कमी आयी और मांग में काफी बढ़ोतरी हुई है। यह सब जानते हैं कि मक्का हमारे देश में अनाज के रूप में खायी जाती है। इसके अलावा उसका इस्तेमाल पशु पक्षियों के आहार के रूप में भी किया जाता है। गन्ने के आलावा देश में एथनाल बनाने में चावल और मक्के का इस्तेमाल किया जा रहा है। जब भारी मात्रा में मक्का का एथनाल बनाने में किया जाने लगा तो उसके दामों में भारी वृद्धि् हो गयी। मुर्गियों का मुख्य आहारा मक्का है। मक्के के दाम बढ़ने से लागत मे बढ़ोतरी हो गयी। मुर्गियों को आहार भी कम मिलने लगा। इसका असर अंडों के उत्पादन पर भी पड़ा है। यही वजह है 5—6 प्रति अंडा अब 9 रुपये तक बेचा रहा है। विशेषज्ञों की मानें अंडों की कीमत मे और बढ़ोतरी हो सकती है।
सारी समस्याओं की जड़ में एथनाल उत्पादन
पिछले दो सालों में देखा गया है कि सरकार एथनाल प्रोडक्शन को काफी बढ़ावा दे रही है। सरकार एथनाल बनाने वाले लोगों को कम ब्याज पर लोन भी उपलब्ध करा रही है साथ ही एथनाल बनाने वाले उत्पादों पर सरकार गन्ना, चावल और मक्का पर रियायत भी दे रही है। आज के समय जहां देश आर्थिक तंगी और बेरोजगारी से जूझ रहा है ऐसे में नेताओं और मंत्रियों के सगे संबंधियों को मुनाफा कमाने के लिये सरकार एथनाल से कमाई के जरिये बना रही है। जो चावल किसान से 3300 रुपये कुंतल पर खरीद रही है एथनाल निर्माता कंपनी को 23 सौ रुपये पर बेच रही है। इस बात से जनता को सरकार की काली करतूतों का पता चला तो उसका गुस्सा सातवें आसमान पर है। इस बात से साफ हो गया है कि मोदी सरकार को आम जनता की समस्याओं से कोई सरोकार नहीं है वो सिर्फ व्यापारियों के फायदे के लिये मौके तलाश रही है।
वाहन मालिक ब्लैंडिड पेट्रोल के खिलाफ क्यों
मोदी सरकार एक तरफ देश के युवा गंभीर समस्याओं को लेकर सड़कों पर आंदोलन कर रहे हैं वहीं दूसरी देश में एथेनॉल की ब्लैंडिग को लेकर पूरे देश में आक्रोश व्याप्त है। सरकार इस बात पर जिद पकड़े हैं कि देश में पेट्रोल में एथनॉल की ब्लैंडिग वाला तेल ही पेट्रोल पंप मिलेगा। इससे आम आदमी सरकार के अढ़ियल रवैये से नाराज है। ऐसा लग रहा है कि देश मेंं सरकार के कार्य करने प्रणाली से जनता में खासा रोष है। सरकार आम जनता को यह समझाने का प्रयास कर रही है एथनॉल के इस्तेमाल करने से देश में बहुत सारी समस्याओं का निदान होगा। प्रदूषण में कमी आयेगी। साथ विदेशी मुद्रा भंडार में भारत सुदृढ़ होगा। विदेश से पेट्रोल का आयात कम होगा तो आर्थिक रूप से देश मजबूत होगा। लेकिन सरकार के दावों से जनता सहमत नही है। बहुत सारे लोगों का कहना है ब्लैंडिड पेट्रोल टी 20 से वाहनों के एवरेज पर अंतर पड़ रहा है। इसके साथ नयी गाड़ियां भी खराब हो रही हैं। टी 20 पेट्रोल से वाहनों के पुर्जों में खराबी आ रही है। इस बात को लेकर बहुत सारे लोग सरकारी की नीतियों का विरोध कर रहे हैं। 2023 के पहले बने वाहनों में काफी दिक्कतें आ रही हैं।
जनता के लिये एथनॉल एक समस्याएं अनेक
पिछले कई सालों से मोदी सरकार के मंत्री नितिन गडकरी एथनॉल की ब्लौंडिंग पर य़द्ध् स्तर पर जुटे हैं। उनका मानना है कि देश में पेट्रोल का विकल्प एथनाल ही है जिसकी वजह से पेट्रोल की खपत कम हो सकती है। प्रदूषण भी कम होगा। देश में लोगों को अच्छा वातावरण भी मिलेगा। दिलचस्प बात यह है कि एथनाल वाले मुद्दे पर नितिन गडकरी का कोई लेना देना नहीं है। उनका मंत्रालय तो सड़क परिवहन है। लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से गडकरी के दोनों बेटों का एथनाल से लेना देना है। दोनों ही बेटे एथनाल इंडस्ट्री से जुड़े है। लोग यह बात कह रहे हैं कि नितिन गडकरी मंत्री रहते हुए अपने बेटों को लाभ पहुंचाने के लिये एथनाल को इतना प्रमोट कर रहे है। दिलचस्प बात यह है कि पेट्रोलियम मिनिस्टर तो हरदीप पुरी हैं लेकिन उनका एथनाल वाले मामले मे कोई खास बयान नहीं आया है।

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