सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ़ इंडिया (SEBI) ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) के ऑनबोर्डिंग समय को घटाने के उद्देश्य से पावर ऑफ़ अटॉर्नी (PoA) दस्तावेज़ों पर डिजिटल हस्ताक्षर स्वीकार करने की मंज़ूरी दे दी है। इस बदलाव से नोटरीकरण, अपोस्टिलेशन और कंसुलर सत्यापन की आवश्यकता खत्म हो जाएगी, जिससे विदेशी निवेशकों के लिए दस्तावेज़ी बाधाएँ कम होंगी और ऑनबोर्डिंग तेज़ होगा। नये निर्देश तुरंत प्रभाव से लागू हुए हैं और regulator ने बताया है कि यह पहल व्यापक डिजिटल उपायों के हिस्से के रूप में की जा रही है ताकि बाजार पहुँच सरल और कुशल बने।

इसके साथ ही SEBI बॉन्ड टोकनाइज़ेशन पर पायलट परियोजना लॉन्च करने की योजना बना रहा है, और इस पर रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) के साथ समन्वय कर रहा है। पायलट का उद्देश्य यह परखना होगा कि क्या साझा लेज़र और स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट का उपयोग करके सुरक्षा और राशि का समकालिक हस्तांतरण संभव है, जिससे सेटलमेंट अधिक कुशल हो और री-कंसिलिएशन लागत घटे। पायलट में स्वचालित कूपन भुगतान और अन्य सर्विसिंग इवेंट्स की व्यवहार्यता की भी परीक्षा की जाएगी। SEBI ने यह भी कहा है कि यह किसी अलग ट्रेडिंग मार्केट का निर्माण नहीं है, बल्कि मौजूदा बॉन्ड मार्केट को सरल, तेज और प्रभावी बनाने की तकनीकी संभावनाओं की जांच है।

संदर्भ स्रोतIndian Express BusinessEconomic Times LatestEconomic Times Markets
पाठकों की राय

टिप्पणियां 0

सभ्य और विषय से जुड़ी भाषा का प्रयोग करें।