पूर्व कांग्रेस सांसद और दिल्ली के प्रभावशाली स्थानीय नेता सज्जन कुमार (आठ दशक के), जो 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े मामलों में दो बार आजीवन कारावास की सजा पा चुके थे, 20 अगस्त 2026 की सुबह Tihar जेल से Safdarjung अस्पताल लाए जाने के बाद मृत घोषित किये गए। उनकी एक आपील, जिसमें 2018 के दंड और सजा को चुनौती दी गयी थी, और पैरोल की मांग उसी दिन सुनवाई के लिए सूचीबद्ध थी।
कुमार को 2018 में राज नगर (पालम कॉलोनी) में पांच सिखों की हत्या और गढ़रवाड़े की आग के संबंध में दिल्ली उच्च न्यायालय ने दोषी माना और उन्हें आजीवन कारावास सुनाया; बाद में 2025 में एक अन्य मामले में भी उन्हें दूसरी आजीवन सजा मिली, जबकि जनवरी 2026 में जनकपुरी‑विकासपुरी मामले में उन्हें बरी किया गया था।
1984 हिंसा के दिल्ली मामलों की जांच‑समाचारें और आधिकारिक रिकॉर्ड दर्शाते हैं कि राजधानी में उस रोजों में लगभग 2,700 लोग मरे और 587 FIR दर्ज हुईं, परंतु बहुत से मुकदमों में देरी, क्लोजर और बरी करने के फैसलों के कारण संवेदनशील परिणाम आए — केवल कुछ दर्जन मुकदमों में ही सजा हुई।
कुमार की राजनीतिक पृष्ठभूमि में पार्षद से संसद तक का सफर और Outer Delhi से तीन बार जीतना शामिल था; 2018 की सजा के बाद उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था। उनकी मृत्यु से उनके ऊपर लंबित अपीलें और पैरोल आवेदन स्वतः प्रभाव से समाप्त हो जाएंगे, जबकि कइयां दंगों से जुड़ी लंबित कार्यवाही अब मुकदमेबाजी के नजरिये से बदल सकती हैं।

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