MP Political sabotage for BJPदतिया उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवार क्यों हारा!

एक तरफ बिहार मे बांकीपुर की सीट भाजपा ने गंवाई वहीं दूसरी ओर मध्यप्रदेश की दतिया सीट भी कांग्रेस उम्मीदार घनश्याम सिंह ने जीत ली। इससे कांग्रेेस के खेमे में खुशी का माहौल है। दूसरी ओर प्रदेश भाजपा ने दतिया की पूरी इकाई के पदाधिकारियों को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। दतिया सीट पर भाजपा का पिछले दो दशकों से कब्जा था। तीन बार से पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा वहां के विधायक रह चुके हैं। 2023 के चुनाव में उन्हें कांग्रेस के उम्मीदवार ने हरा दिया था। मध्य प्रदेश में पिछले दो दशकों से भाजपा की सरकार रही है। ऐसी हार का बीजेपी को अंदेशा भी नहीं था। प्रदेश और केन्द्र सरकार को इससे भारी झटका लगा है।

बीजेपी ने नरोत्तम मिश्रा को टिकट क्यों नहीं दिया

इस उपचुनाव में नरोत्तम मिश्रा को उम्मीद थी कि उनको टिकट मिल जायेगा। लेकिन केन्द्रीय नेतृत्व और प्रदेश भाजपा ने उनको टिकट नहीं दिया। इससे मन ही मन वो बौखला गये। इस पर उनके समर्थकों ने दतिया और उसके आसपास के इलाकों में धरना प्रदर्शन और रास्ता जाम कर अपना विरोध जताया। बाद में नरोत्तम मिश्रा ने पार्टी नेतृत्व का आदेश मान कर यह वादा किया कि वो पार्टी उम्मीदवार आशुतोष तिवारी को जिताने के ​जिताने में पूरा दम खम लगा देंगे। लेकिन दतिया उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवार को कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने हरा दिया। इतना ही नहीं नरोत्तम मिश्रा के बूथ पर बीजेपी प्रत्याशी को वोट नहीं मिला। ऐसे में हार का ठीकरा नरेात्तम मिश्रा के सिर पर फूटना तय था। उन सभी भाजपा पदाधिकारियों पर गाज गिरायी गयी जो पूर्व मंत्री के करीबी माने जाते थे।

शाह के करीबियों पर गाज गिराने का किस्सा

चर्चा है कि नरोत्तम मिश्रा को होम मिनिस्टर अमित शाह का करीबी माना जाता है। भाजपा में यह चल रहा है कि अमित शाह को धीरे धीरे कमजोर करने की साजिश चल रही है। जब से नितिन नबीन को भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है तभी से दूसरे नंबर रहे अमित शाह खिसक कर तीसरे नंबर पर आ गये हैं। इससे पहले सरकार के कद्दावर मंत्री भूपेंद्र यादव के खास आफिसियल स्टाफ को भी चलता कर दिया गया था। नरोत्तम मिश्रा को टिकट न देना भी इसी राजनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

नरोत्तम मिश्रा के टिकट कटने की वजहें

नरोत्तम मिश्रा एक दबंग और मुंहफट नेता के रूप में कुख्यात थे ​चूंकि वो प्रदेश के गृहमंत्री थे इसलिये उनकी दबंगई पर कोई रोकटोक नहीं थी। कई बार अपने बड़बोलेपन और विवादित बयानों के लिये बदनाम थे। पार्टी नेतृत्व भी उनकी बयानबाजी और आदतों से परेशान हो कन्नी काट लिया करते थे। अक्सर वो बॉलिवुड के मामलों पर बेवजह बयान दे कर सुर्खियों में छाये रहते थे। उनके निशाने पर अक्सर खान ऐक्टर बने रहते थे। इन्हीं वजहों से 2023 में वो दतिया से ही चुनाव हार गये। पार्टी उम्मीदवार को टिकट देने से पहले एक सर्वे कराती है उस सर्वे में नरोत्तम मिश्रा और उनके बेटे कर्ण मिश्रा के खिलाफ रिपोर्ट आयी। इससे प्रदेश पार्टी नेतृत्व और केन्द्रीय संगठन ने उन्हें टिकट न देकर युवा नेता आशुतोष तिवारी को टिकट दिया। लेकिन उपचुनाव में घनश्याम सिंह ने बाजी मार ली और बीजेपी उम्मीदवार को मुंह की खानी पड़ी।

पाठकों की राय

टिप्पणियां 0

सभ्य और विषय से जुड़ी भाषा का प्रयोग करें।