मोदी और भागवत मे नूरा कुश्ती :चले थे छब्बे जी बनने दुबे जी भी नहीं रहे/div>नरेंद्र मोदी जहां चौथी बार पीएम बनने का ख्वाब देख रहे थे। हालात इतने खराब हो गये हैं कि सरकार संकट में आ गयी है। युवाओं के आंदोलन और विपक्ष के दबाव में सरकार को अपने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेना पड़ा है। हालात इतने बुरे हो गये हैं कि पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह सदन में विपक्ष का सामना नहीं कर पा रहे हैं। मानसून सत्र खत्म होने को आ रहा है लेकिन मोदी शाह एक दिन भी सदन में नहीं मौजूद रहे हैं। संसद के दोनों सदनों के अंदर विपक्ष पूरी तरह से सरकार पर हावी है। पहले जेन जी ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगा जिसे सरकार ने मांग लिया लेकिन सीजपेी के संसद मार्ग मार्च में दिल्ली पुलिस ने जिस तरह अमानवीय लाठीचार्ज और पैलेट गन का प्रहार प्रदर्शनकारियों पर किया। उससे संसद के दोनों में इंडिया ब्लाक के सांसद और लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पीएम मोदी और अमित शाह के बयान की मांग कर हैं। लेकिन पीएम और गृहमंत्री देश में रहते हुए भी सदन में नहीं जा रहे हैं। अब तो विपक्ष अमित शाह का इस्तीफा मांग रहा है। मोदी युवाओं को लुभाने में रहे विफलयुवाओं के दबाव में पीएम मोदी ने इंस्टा पर वीडियो डालना शुरू कर दिया। वो मित्रों से फ्रेंड्स पर आ गये लेकिन उनका ये टोटका भी काम नहीं आया है। पीएम मोदी की छवि को भी भारी झटका लगा है। प्रदर्शन के दौरान पीएम के इस्तीफे की मांग शुरू हुई थी। इस बात को लेकर पीएम अपनी छवि को सुधारने में जुटे हुए है। जिन युवाओं की बात सुनने के लिये सरकार के पास समय नहीं था अब हर बात में युवाओं को जोड़ने का प्रयास शुरू हो गया है।सरकार के बचाव में उतरे संघ प्रमुख मोहन भागवतमोदी सरकार को संकट में देखते हुए संघ प्रमुख भागवत ने भी उन युवाओं के साथ संवाद करने प्रयास किया है जो मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल हुए हैं। उन्होंने संवाद के दौरान युवाओं को यह एहसास कराने का प्रयास किया कि वो सरकार की कार्य प्रणाली के खिलाफ हैं। लेकिन अपने प्रयास में वो कितना सफल हए ये तो नहीं पता लेकिन अब उन्हें भी युवाओं की समस्याओं और बेरोजगारी की चिंता होने लगी है। पिछले कई सालों से युवा शिक्षा में भ्रष्टाचार, कुप्रबंधन और पेपरलीक का मुद्दा उठा रहे थे न तो सरकार उनकी बात सुन रही थी और न संघ प्रमुख मोहन भागवत। जब मामला हाथ से निकल गया तो मोहन भागवत को सरकार के बचाव में आगे कर दिया गया। ये बात तो है कि जिस ऐश ओ आराम की जिंदगी मोहन भागवत जी रहे हैं। वो मोदी सरकार की वजह से है अगर ​सरकार पर संकट आता है तो संकट उनके रहन सहन पर भी होगा। दिखावे के लिये संघ प्रमुख सरकार पर छोटे मोटे हमले करते दिख जाते हैं ताकि लोग यह समझे कि संघ और सरकार के बीच मतभेद है। जबकि वास्तविकता तो यह है कि दोनों ही एक थैली के चट्टे बट्टे हैं।

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