Supreme Cort के जज ने दिये संकेत, डूब सकती मोदी शाह की राजनीतिक नैया
कुछ दिनों में देश की राजनीति में बड़ा होने वाला है। जिससे केन्द्र की मोदी सरकार की परेशानियां बढ़ सकती हैं। वैसे भी पिछले दो सालों से इंडिया ब्लाक के निशाने पर एनडीए सरकार निशाने पर है। विपक्ष शिक्षा में भ्रष्टाचार, अपराध, नीट पेपर लीक, अनेक मंत्रालयों में मनमानी, स्वास्थ्य समस्याओं और महिला सुरक्षा और किसानों की परेशानियों को लेकर विपक्ष सरकार को बुरी तरह घेर रहा है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने एक तीन साल पुराने मामले में एक ऐसी टिप्पणी कर दी है जिससे मोदी सरकार की मुसीबतें बढ़ सकती हैं। देश की राजनीति भयानक भूचाल आ जायेगा।
सरकार के साथ चुनाव आयोग पर भी हो सकती है कार्रवाई
चुनाव आयोग की परेशानियां भी बढ़ सकती हैं। वैसे भी कई मसलों पर विपक्ष के निशाने पर है उनका मानना है की मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार केन्द्र सरकार के इशारों पर विपक्षी पार्टियों के साथ निष्पक्ष नहीं हैं। शिवसेना यूबीटी की सरकार गिराने वाले शिवसेना के बागी विधायकों ने पार्टी के साथ बगावत कर भाजपा के साथ मिलकर महाराष्ट्र में सरकार बना ली थी तब से अब तक मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। मामला पूर्व सीजेआई के सामने लाया गया था। लेकिन अब तक उसका निर्णय नहीं आया है। लेकिन अब तीन सदस्यीय बेंच में शामिल एक जज मामले में एक ऐसी टिप्पणी कर दी जिससे मोदी सरकार और एनडीए के घटक दलों की नींद और चैन लुट गया है। सुप्रीम कोर्ट के जज जॉयमाला बाला बागची में अपने आब्सर्वेशन में कह दिया है कि शिवसेना को तोड़ने वाले विधायकों की सदस्यता मूल पार्टी के संस्थाक और अध्यक्ष की सहमति पर निर्भर करती है। यानि अगर मूल पार्टी के अध्यक्ष की अनुमति पर ही उनकी विधानसभा व सांसदी वैध होगी। अगर यह बात जज अपने आदेश में लिख देते हैं तो मोदी सरकार के पैरों के नीचे से जमीन खिसक जायेगी। फिलहाल न्यायधीश जॉयमाला बागची ने टिप्पणी कर देश की राजनीति में तूफान ला दिया है।
चुनाव आयोग ही मदद से मोदी शाह ने इन पार्टियों को तोड़ा
भाजपा ने जांच एजेंसीज और चुनाव आयोग की मदद से विपक्षी सरकारों को गिराने और तोड़ने की साजिश रची है। जिन पार्टियों को तोड़ा गया उनमें शिवसेना, एनसीपी, टीएमसी, आम आदमी पार्टी का नाम आता है। इसी साल भाजपा ने ईडी, सीबीआई आईटी व चुनाव आयोग की मदद से सबसे पहले आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों को तोड़ कर आप को भारी झटका दिया। केजरीवाल के करीबी राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने अपने साथ छह अन्य सांसदों को अपने पाले में कर बगावत कर दी। दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले भी भाजपा ने आम आदमी पार्टी के एक दर्जन से अधिक विधायकों को बागी होने पर मजबूर किया। उनमें से अधिक विधायक भाजपा में शामिल हो गये। ऐसा करने में भाजपा शातिर है। मई में प बंगाल में चुनाव के पहले से ही मोदी शाह ने चुनाव आयोग की मिलीभगत से अपनी जीत की पटकथ लिखनी कर दी थी। वहां ज्ञानेश कुमार ने एसआईआर की आड़ में लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी के आधार पर लाखों की संख्या में मतदाताओं के नाम काट कर टीएमसी को कमजोर किया। उसकी वजह से भाजपा को बंगाल फतेह करने में विशेष परेशानी नहीं हुई। सुरक्षा बलों की मदद से मुस्लिम मतदाताओं को वोट डालने नहीं दिया गया। कुल मिला कर 27 लाख वोटर वोट नहीं डाल सके। यहां पर सुप्रीमकोर्ट की हीलाहवाली से भी प बंगाल में भाजपा को काफी फायदा हुआ। चुनाव परिणाम आने के बाद टीएमसी में बगावत हो गयी। 80 विधायकों में 65 विधायकों ने बगावत कर दी। इतना ही नहीं टीएमसी के 20 20 सांसदों ने पार्टी से इस्तीफा दे कर एक अनजान सी पार्टी एनसीपीआई में विलय कर दिया। जो संसद में टीएमसी से अलग बैठ रहे हैं। चर्चा है कि ये सब कुछ भाजपा इसलिये कर रही है क्यों कि उसे संसद में दो तिहाई बहुुमत बनाना है ताकि उसके महत्वपूर्ण बिल पास हो सकें। संसद के वित्त सत्र में मोदी सरकार महिला आरक्षण संशोधन और डिलिमिटेशन बिल विपक्ष के विरोध के चलते पास नहीं हो सका था।

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