भारत में मोबाइल सर्विस प्रोवाइडर कंपनियां लगातार सरकार की मदद से ग्राहकों का धनादोहन कर रही हैंं। किसी न किसी बहाने कंपनियां ग्राहकों की जेब पर डाका डाल रही हैं। लेकिन सरकार इन पर नियंत्रण करने के बजाये इन कंपनियों साथ खड़ी दिख रही है। इन कंपनियां पर नियंत्रण करने वाला विभाग ट्राई जनहित में कुछ भी प्रभावशाली नहीं दिख रहा है। मोबाइल सर्विस प्रोवडर क्षेत्र में जियो, एअरटेल और वोडाफोन आइडिया का कब्जा है। बीएसएनएल सबसे
मनचाहा मोबाइल रिचार्ज के दामों में इजाफा
जानकारी हो कि डेढ़ दो साल पहले ही तीनों कंपनियों ने सहमति से 20 से 30 फीसद रिचार्ज पर दाम बढाये थे। इससे उपभोक्तओं पर 25 से 30 अतिरिक्त बोझ पड़ा था। इस मामले में ट्राई भी कुछ सख्त कदम उठाता नहीं दिख रहा है। ये कंपनियां जब मनचाहा मोबाइल रिचार्ज के दामों में इजाफा कर देती हैं। ताजा मामला एयरटेल का है इस कंपनी ने अचानक गुचचुप तरीके से मोबाइल रिचार्ज के स्लैब में फेर बदल कर दिया। इसके जरिये कंपनी ने न्यूनतम स्लैब 299 समेत अनेक स्लैब हटा दिये। इससे उपभोक्ता को अधिक राशि के रिचार्ज करना पड़ेगा। कंपनी का दावा है कि हमने रिचार्ज के दामों में कोई बढोतरी नहीं की। लेकिन बहुत चालाकी से आम उपभोक्ता की जेब पर अरिक्ति बोझ डाल दिया है। ये करतूत अभी एयरटेल ने की देखा देखी जियो और वोडाफेान भी करने से नहीं चूकेंगी। इस बात न तो भारत सरकार की कोई नजर है और न ही इन कंपनियों रेगुलेट करने वाली संस्था ट्राई।

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