मोदी सरकार बचाने को फ्लाइट मोड में मंत्रीगण

मोहन भागवत भी विदेश दौरों पर

आज के समय में जो हालात मोदी सरकार के हैं 12 सालों में ऐसे कभी नहीं रहे हैं। विश्वगुरु की छवि वाले नरेंद्र मोदी इतने परेशान कभी नहीं दिखे थे। राहुल गांधी के नेतृत्व में इंडिया ब्लॉक एक जुट हो कर सरकार की धज्जियां उड़ाने से बाज नहीं आ रहे हैं। अब यह चर्चा चल रही है कि मोदी अपना तीसरा कार्यकाल भी पूरा कर पायेंगे कि नहीं। संघ की तरफ से भी संकेत आ रहे हैं कि मोदी का विकल्प ढूंढने की जरूरत है। देशका हर तबका युवा, किसान, महिला, व्यापारी और उद्योगपति सब के सब सरकार की नीतियों से खफा चल रहा है। देश में मोदी सरकार एक तरफ युवाओं की बेचैनी और गुस्से से परेशान है वहीं राहुल गांधी के नेतृत्व में सत्ता की जड़ों में मट्ठा डालने में प्रयासरत है।

मंत्रियों को विदेश दौरे पर क्यों भेजा गया!

जहां मोदी सरकार हिचकोले खा रही है वहीं सरकार के दिग्गज मंत्रियों को विदेश दौरे पर भेजे जाने के बारे में चर्चा है कि पीएम मोदी की साख और छवि को निखारने की कोशिश की जा रही है। इसी कड़ी में विदेश मंत्री एस जयशंकर को रूस भेजा गया है तो निर्मला सीतारमन को यूएसए के दौरे पर भेजा गया है। अजित डोभाल चीन के दौरे पर हैं। चीन के राष्ट्रपति जिप पिंग शी अगस्त के अंत में ब्रिक्स की मीटिंग में भाग लेने दिल्ली आ रहे है।

ऐसे में सरकार को बचाने के लिये सरकार के दिग्गज मंत्रियों को पीएम मोदी ने छवि बचाने को जुटा दिया है। इतना ही इस मामले में सरकार की छवि को निखारने को संघ प्रमुख मोहन भागवत को यूएसए और कनाडा की यात्रा के लिये दिया है। वहां से भी मोहन भागवत की वसुधैव कुटुंबकम कार्यक्रम का विरोध देखने को मिल रहा है। ट्रंप और मोदी की दोस्ती का किस्सा सुनाने वाले इस बात से हैरान है कि आखिर ऐसे क्या हालात हो गये हैं कि ट्रंप अपने दोस्त मोदी के इतने खिलाफ कैसे हो गये। हालात यह हैं कि पीएम मोदी ट्रंप के सामने जाने से कतरा रहे हैं यही वजह है कि अबकी बार यूएसए स्वयं न जाकर संघ प्रमुख मोहन भागवत को रवाना किया गया है। लेकिन समाचारों की मानें तो यूएस में भागवत के कार्यक्रम का विरोध किया जा रहा है।

विपक्ष के निशाने पर पीएम और एनडीए सरकार

विपक्ष के नेता राहुल गांधी मोदी सरकार को जनसरोकारों को लेकर पीएम मोद को निशाने पर रखे हुए है। राहुल गांधी ने शिक्षा मंत्रालय मे फैले भ्रष्टचार और कुप्रबंधन को लेकर पीएम मोदी को घेर रखा है। सीजेपी और राहुल गांधी ने सरकार की नाक में नकेल डाल कर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा कराने सफलता प्राप्त की है। युवा छात्रों के आंदोलन से न केवल सरकार की फजीहत हुई बल्कि खासतौर से पीएम मोदी की निजी छवि पर भी हमला किया गया। तब से पीएम इतना घबरा गये हैं कि सिंतबर में होने वाले मंत्रिमंडल विस्तार में चिंतित हो गये हैं। यह भीचर्चा चल रही है कि लगभग तीन दर्जन मंत्रियों के विभाग बदल सकते हैं या उनकी छुट्टी हो सकती है। सबसे बड़ी बात यह है कि सरकार संकट काल से गुजर रही है वहीं अगले साल यूपी समेत आधा दर्जन प्रदेशों में चुनाव हैं। वर्तमान हालात में भाजपा की बड़ी फजीहत होने की आशंका जतायी जा रही है। भाजपा किसी तरह से आगामी चुनाव जीतना चाह रही है। कुछ लोग यूपी के चुनाव को 2029 का सेमी फाइनल बता रहे हैं।

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