न्यायधीशों ने दिखाये सत्ता को तेवर, क्या देश के जज जाग गये हैं!
सरकार के लिये सिरदर्द बन रहे न्यायधीश
पिछले दस बारह सालों से संवैधानिक संस्थाओं पर सवालिया निशान लग रहे थे कि वो सरकार के साथ मिल कर अपने कर्तव्यों से दूर हो गयी हैं। ऐसे में अदालतों से भी ऐसे मामले देखने को मिल रहे थे जैसे सरकार और अदालतों में गठबंधन हो गया है। जनसरोकारों को नजरअंदाज कर सत्ता के साथ कदमताल कर रहे हैं। चाहे वो चुनावी चंदे का मामला हो या चुनाव आयोग में आयुक्तों की नियुक्ति का मामला हो सब जगह देश की सवोच्च अदालत का रुख काफी नरम रहा है। सरकार के मनमानी पर रोक लगाने में अदालतें चुप ही दिखती रही हैं। इस वजह से सरकारें अपनी मनमानी पर उतर गयी हैं। सुप्रीमकोर्ट ने बुल्डोजर चलाने पर प्रतिबंध लगाया गया था लेकिन आज भी भाजपा शासित राज्यों में संप्रदाय विशेष के घरों व धार्मिक स्थलों पर बुल्डोजर चल रहे हैं। यानि अब सुप्रीमकोर्ट के आदेशों को भी राजनीतिक दल और सरकारें नहीं मान रहे है। लेकिन अब लगता है कि जजों की सोई भी आत्मा जाग गयी है वो समझ गये हैं कि अगर जनता के दिल में उनकी छवि धूमिल हो गयी तो उनका आत्म सम्मान और वजूद दोनों ही खतरे में हो जायेगा। सीजेआई ने नोयडा के लॉ छात्र अक्षत त्रिपाठी के मामले मजिस्ट्रेट को लताड़ लगाते हुए कहा कि सुप्रीमकोर्ट के आदेश के बावजूद छात्र के खिलाफ कैसे कार्रवाई कर दी। इतना ही नहीं बिना वजह छात्र को लाखों का नोटिस गिया गया। सुप्रीमकोर्ट में तलब कर लिया गया है। जजों के इस रवैये पता चल रहा है कि अब राजनीतिक दबाव में जज आने वाले नहीं हैं।
जजों को सोशल मीडिया पर किया जाता है ट्रोल
हैरानी की बात यह है कि जो जज सरकार के मनमाफिक फैसले नहीं करते हैं उनको सोशल मीडिया पर ट्रोल किया जाता है। इतना ही नहीं संवैधानिक पदों पर बैठे लोग भी सुप्रीमकोर्ट पर सवाल उठाने से बाज नहीं आ रहे है। आपको पूर्व सीजेआई संजीव खन्ना याद होंगे कि तरह से सत्ताधारी दल के सांसद ने खुलाआम देशद्रोही तक कह दिया था। विवादित टिप्पणी करने पर सत्ताधारी दल ने उस सांसद के प्रति कोई ऐक्शन नहीं लिया था। पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने पर निजी कार्यक्रम में सुप्रीमकोर्ट पर निशाना साधा था। लेकिन पिछले दो एक माह से सुप्रीमकोर्ट और अन्य अदालतों में जजों को अपनी छवि बचाने की सुध आयी है। सुप्रीमकोर्ट और हाइकोर्ट के जजों ने सरकारों की परवाह किये बिना अपनी निष्पक्षता को जता दिया है। ऐसे में सरकार की त्यौरियां चढ़ना लाजिमी है। शायद अदालतों में बैठे जजों की अपनी छवि और वजूद को बचाये रखने की याद आ गयी है। अदालतों ने कुछ ऐसे फैसले लिये जिनकी भाजपा और सरकारों को उम्मीद नहीं है। इससे जनता के दिलों में अदालतों के प्रति विश्वास बढ़ता दिखने की उम्मीद जगी है।
नोयडा डीएम के खिलाफ जज ने दिया कड़ा फैसला
नोयडा की डीएम के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा ही सख्त कदम उठाते हुए पांच लाख का जुर्माना ठोक दिया है। ये डीएम कोई साधारण आइएएस नहीं हैं ये मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश गुप्ता की बेटी मेघा रूपम हैं।वैसे साधारण तौर पर देखा जाता है कि अदालतें अक्सर सत्ता के करीबी लोगों के प्रति नरम रवैया अपना लेते हैं। लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट के सीनियर जज अतुल श्रीधरन ने डीएम की मनमानी पर सख्ती बरती औरम आदेश दिया कि नोयडा की एक छात्रा आकृति चौधरी को सिर्फ मजदूरों को उनके हक की लड़ाई के लिये एनएसए जैसे गंभीर मामले में बिना सुबूतों के मुकदमा करा दिया और उसे महिनों तक जेल में रखा। जब मामला हाईकोर्ट पहुंचा तो जज श्रीधरण बिफर गये और उन्होंने डीएम मेघा रूपम को लताड़ लगाते हुए छात्रा की रिहाई के आदेश दिये और उन पर पांच लाख का जुर्माना भी ठोक दिया।ये बात यूपी और केन्द्र की मोदी सरकार को हजम नहीं हुई और मेधा के बचाव के लिये सालिसीटर जनरल तुषार मेहता को उतार दिया है। इस बात से समझ में आ गया कि ज्ञानेश कुमार उनके लिये कितने अहम् हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त बीजेपी के चुनाव जीतने के लिये एसआईआर के जरिये ग्राउन्ड तैयार कर रहे हैं। ऐसे में उनकी बेटी को बचाने की जिम्मेदारी तो बनती है।
अपनी ईमानदारी और निष्पक्षता के लिये विख्यात हैं जज
इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज अपनी साफगोई, निडरता निष्पक्षता और साहस के लिये मशहूर हैं इलाहाबाद हाईकोर्ट से पहले वो मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के वरिष्ठ जज के रूप में तैनात थे। पिछले साल उन्होंने मध्यप्रदेश सरकार के मंत्री विजय शाह के खिलाफ केस दर्ज करने का फैसला दिया था। मंत्री विजय शाह ने सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी के प्रति अभद्र व विवादित टिप्पणी की थी जिसको लेकर जज श्रीधरण ने मध्यप्रदेश के डीजी पुलिस को शाह के खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश दिया था। पुलिस ने हाईकोर्ट के आदेश पर मामूली धाराओं में केस दर्ज कर लिया। श्रीधरण ने पुलिस की इस लापरवाही पर सख्त टिप्पण करते हएु गंभीर धाराओं में मामला दर्ज करने का आदेश दिया था। लेकिन इसी दौरान जज का तबादला इलाहाबाद उच्च न्यायालय में कर दिया गया। इस तबादले पर काफी चर्चा हुई थी। श्रीधरण अपने स्वभाव के अनुरूप पुलिस और अध्किारियों की मनमानी को लेकर गंभीर टिप्पणी करने से बाज नहीं आ रहे है। देवरिया पुलिस की मनमानी और लापरवाही को लेकर उनका एक बयान काफी वायरल हो रहा है। उन्होंने कहा कि देवरिया पुलिस प्रशासन झूठों का गैंग है।

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