Modi govt. fail to control food adultration
मुनाफाखोरों ने अब पूजा अर्चना को भी नहीं बख्शा
किसके इशारों पर हो रही है मिलावटखोरी
मिलावट खोरी और भ्रष्टाचार रोकने में सरकार की भूमिका
दूध, दही, पनीर, खोया और खान पान की मिलावट की खबरें तो बहुत सुनायी देती हैं। लेकिन मुनाफाखोरों अपनी कमायी का जरिया अब पूजा अर्चना सामग्री को भी नहीं बख्शा है। पूजा अर्चना और धार्मिक प्रयोजन में आने वाली वस्तुएं भी कमाई का जरिया बन गयी हैं। धर्म के नाम पर बिकने वाली धूप, अगरबत्ती, घी तेल व हवन सामग्री पर मिलावटखोरों की नजर पड़ गयी। जैसा कि सब जानते हैं कि भाजपा हिन्दू धर्म की ठेकेदारी करती है और उसी के बल पर पिछले तीन बार से सरकार में हैं। व्यापारी वर्ग समझता है कि हिन्दू लोग धार्मिक आयोजन में बिना किसी हिचक के पूजन सामग्री को खरीदत लेते है। यही वजह है धूप, अगरबत्ती, लोबान, कपूर घी तेल आदि के नाम पर जनता को बेवकूफ बना कर अंधी कमाई कर रहे हैं। पिछले 12 सालों में पूजन सामग्री बनाने वाले व्यापारियों ने जमकर कमाई की है। अफसोस की बात तो यह है कि मुनाफा कमाने की होड़ में पूजन सामग्री में जमकर मिलावट की जा रही है। धूप अगरबत्ती, कपूर और तेल घी में जाने क्या क्या मिलाया जा रहा है। अफसोस की बात तो यह है कि भारत सरकार का खाद्य और प्रसंस्करण विभाग किस कदर काम कर रहा है कि मिलावटखोरी और भ्रष्टाचार की बाढ़ आ गयी है। धार्मिक आयोजनों में बिकने वाली वस्तुओं के बाजार में बड़ी बड़ी कंपनियां उतर गयी हैं। एक तरफ सरकार कमाई कर रही है तो दूसरी ओर व्यापारी मुनाफाखोरी में मस्त हैं।
बाजार नकली सामान भरा पड़ा
आये दिन समाचार पत्रों और टीवी न्यूज में सुनायी देता है कि खुलेआम नकली टूथ् पेस्ट, नमक, दवाइयां और खाद्य पदार्थ छापे में बरामद हो रहे हैं। विभाग अगर इतना सक्रिय है तो लगातार नकली सामान की आपूर्ति कैसे हो रहा है। दिलचस्प बात यह है कि खाद्य विभाग साल में सिर्फ दो बार ही सक्रिय दिखता है। एक होली के समय और दूसरा सावन के महीना में। दोनों मौकों पर दूध दही मक्खन मावा और पनीर की बेतहाशा मांग होती है। ऐसे में खाद्य विभाग कर्मचारी सक्रिय दिखते हैं। कुछ जगहों पर सैंपलिंग और छापेमारी होती है। दस महिनों में जम कर मिलावटी खोया, दूध, दही मक्खन पनीर घी बाजार में मिलता है। संसदीय कार्यमंत्री प्रहलाद जोशी ने पिछले साल संसद में स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मिलावटी खाद्य सामग्री को लेकर पत्र लिखा था लेकिन इस बारे में केन्द्र सरकार ने कोई कदम उठाया हो ऐसा नहीं दिखता है। यह भी साफ है कि देश भर में जितना दूध दही मक्खन पनीर घी और मावे की आपूर्ति की जा रही है उतनी मात्रा में उत्पादन भी नहीं हो रहा है। दरअसल बात यह है कि सरकार किसी भी दल की हो सबको शाही ऐश ओ आराम जिंदगी चाहिये। एमपी और एमएलए का सीधा कनैक्शन मिलावटखोरी में लिप्त व्यापारियों से होता है जो अपनी मोटी कमाई का कुछ हिस्सा इलाकाई नेताओं को देते हैं उसके एवज में घूसखोर नेता मिलावट के धंधे को संरक्षण देते हैं। कोई दल ऐसे प्राणघातक मिलावटी पदार्थों की बिक्री और उत्पादन पर रोक लगाने की मंशा नहीं रखता है।

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