सीजेपी के सह‑संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका को अदालत ने सशर्त जमानत दी; मीडिया रिपोर्टों के अनुसार जमानत का आदेश 21 अक्टूबर 2026 को एसईएम/संबंधित कोर्ट ने जारी किया और बाद में उन्हें रिहा किया गया है। (रिपोर्टिंग: Indian Express, ABP Live, Dainik Jagran) गرفتारी और प्रारम्भिक हिरासत प्रमुख समाचार संस्थानों की रिपोर्टों के अनुसार दिल्ली पुलिस ने सौरव दास और आशुतोष रांका को जंतर‑मंतर पर कार्यक्रम आयोजित करने/प्रवेश के प्रयास के सिलसिले में 13–14 अक्टूबर 2026 के आसपास हिरासत में लिया और उन्हें कोर्ट में पेश किया गया। प्रारम्भिक तौर पर दोनों को पुलिस/जुडिशियल कस्टडी में रखा गया और उनकी हिरासत के समय‑संबंधी आदेश कुछ बार बढ़ाए गए। (रिपोर्टिंग: Indian Express) जमानत का आदेश और शर्तें कई आउटलेट बताते हैं कि स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) या संबंधित अदालत ने 21 अक्टूबर 2026 को सशर्त जमानत का आदेश दिया। रिपोर्टों के अनुसार जमानत पर surety और बांड जैसी शर्तें लगीं; अदालत ने सार्वजनिक शांति बनाए रखने से जुड़े प्रतिबंधों का भी उल्लेख किया। (रिपोर्टिंग: ABP Live, Indian Express, Amar Ujala) रिहाई‑समय और रिपोर्टिंग का अंतर कुछ मीडिया कवरेज में कहा गया है कि दोनों नेताओं को "सात दिनों बाद जेल से रिहा" किया गया। हालांकि उपलब्ध रिपोर्टों से स्पष्टता में मतभेद दिखते हैं: गिरफ्तारी‑तिथियाँ (13–14 अक्टूबर) और जमानत‑आदेश (21 अक्टूबर) पर स्रोत अधिकांशतः सहमत हैं, जबकि रिहाई की सटीक तारीखें और "सात दिनों" के संदर्भ को अलग‑अलग रिपोर्टों ने भिन्न तरीके से प्रस्तुत किया है। (रिपोर्टिंग: Indian Express, ABP Live, Dainik Jagran) — इस रिपोर्ट में उपलब्ध स्रोतों में रिहाई की ठोस एकल तिथि सभी में समान नहीं है। रिहाई में देरी के कारण बताये गए कई रिपोर्टों ने बताया कि जमानत की प्रक्रिया के दौरान प्रस्तुत sureties और दस्तावेजों की पड़ताल, कुछ sureties पर आपत्तियाँ (जैसे दस्तावेजों की वैधता या कथित आपराधिक पृष्ठभूमि) और पुलिस/कोर्ट द्वारा शांति‑व्यवस्था के हवाले से विलंब मुख्य कारण रहे। इन कारणों के चलते जमानत के बाद भी रिहाई में देर हुई, और अंततः सीमित/सशर्त जमानत दी गई। सुरक्षा‑धमकियों और कानूनी कार्रवाई जमानत सुनवाई के दौरान किसी मजिस्ट्रेट/अदालत को जान से मारने की धमकी मिलने की खबरें भी आईं; Jansatta ने बताया कि मामले में दिल्ली पुलिस ने अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ FIR दर्ज की है, जिससे सुनवाई के समय सुरक्षा‑स्थिति और तनाव पर प्रकाश पड़ा। (रिपोर्टिंग: Jansatta) राजनैतिक प्रतिक्रिया और आगे की सक्रियता का संदर्भ कुछ मीडिया कवरेज में सीजेपी के भीतर रिहाई के बाद खुशी और राहत की बात की गयी है और कहा गया है कि पार्टी जल्द आंदोलन की घोषणा कर सकती है तथा सरकार और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाएगी। इन दावों को रिपोर्ट्स ने पार्टी सूत्रों/मीडिया कवरेज के रूप में उद्धृत किया है; परंतु मौजूदा कवरेज में किसी आधिकारिक घोषणा की पुष्टि स्पष्ट रूप से नहीं मिली। (रिपोर्टिंग: ABP Live, Amar Ujala) क्या कन्फर्म है और क्या अस्पष्ट कन्फर्म: कई राष्ट्रीय मीडिया आउटलेटों ने गिरफ्तारी (13–14 अक्टूबर) और कोर्ट/SEM द्वारा 21 अक्टूबर 2026 को जमानत‑आदेश होने की रिपोर्टिंग की है; जमानत पर surety/bond और शांति‑रखने जैसी शर्तों का उल्लेख किया गया है।
सौरव और आशुतोष रांका को जमानत कैसे मिली
आखिरकार सीजेपी नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को एसडीएम ने बेल ग्रांट कर दी। सात दिनों बाद दोनों को जेल से रिहा कर दिया गया है। इससे सीजेपी के अंदर खुशी की लहर छा गयी है। चर्चा है कि सीजेपी ने आशुतोष और सौरव की रिहाई से राहत महसूस की है। अब जल्द ही सीजेपी आंदोलन की घोषणा करेगी। दोनों नेताओं की रिहाई के बाद सीजेपी और मजबूती से मोदी सरकार की तानाशाही और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफा मांगने की जंग में उतर जायेगी।
AI-generated प्रतिनिधि चित्र
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