Lead: 23 सितंबर 2026 को द इंडियन एक्सप्रेस की एक जांच रिपोर्ट में कहा गया कि चुनाव आयोग के दो चुनाव आयुक्त — सुखबीर सिंह संधु और विवेक जोशी — ने पिछले लगभग 10 महीनों में विशेष गहन सुधार (SIR) से जुड़ी निर्णय प्रक्रियाओं पर कम से कम 14 औपचारिक आपत्तियाँ दर्ज कीं; रिपोर्ट में आपत्तियों का संबंध वोटर‑रोल से हटाने, फॉर्म‑6 में बदलाव, ERO‑Net/डेटाबेस नियंत्रण और अन्य SIR प्रक्रियाओं से बताया गया। यह रिपोर्ट देशभर में राजनीतिक प्रतिक्रियाओं और विरोध प्रदर्शन का कारण बनी और विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की बर्खास्तगी या इस्तीफे की माँग उठाई। (The Indian Express, 23 Sep 2026) आयोग की प्रतिक्रिया और राजनीतिक विवाद: चुनाव आयोग ने “रिफ्ट” (दरार) वाले दावे को खारिज करते हुए कहा है कि अंदरूनी आपत्तियाँ सामान्य कार्यवाही का हिस्सा हैं; वहीं विपक्ष और नागरिक समाज रिपोर्ट के बाद कई जगहों पर लगातार प्रदर्शन और जांच की माँग कर रहे हैं। सरकार‑विरोधी दलों ने आयोग की निष्पक्षता और SIR के तरीकों पर सवाल उठाए हैं। (UNI, Indian Express coverage, India Today coverage, Sept–Oct 2026) केरल में विरुद्ध मामला और कानूनी चर्चा: 4 अक्टूबर 2026 को केरल सरकार ने उन मामले‑वृत्तों के संदर्भ में विवेचना के आदेश देने की रिपोर्टें दीं जो 2006 की किसी शिकायत या घटना से जुड़ी बताई जा रही हैं और सार्वजनिक बहस में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आगे के कानूनी प्रश्न उठे हैं; अक्तूबर कवरेज के अनुसार यह चर्चा मुख्य चुनाव आयुक्त की संवैधानिक सुरक्षा/हटाने के प्रावधानों (Section 16 / हटाने की शर्तें) पर भी जा रही है। (AajTak, 4 Oct 2026) हरदीप पुरी‑संबंधी सामग्री और अमेरिकी दस्तावेज़: 30 जनवरी 2026 को अमेरिकी न्याय विभाग ने Jeffrey Epstein से जुड़ी रिकॉर्डों के जवाब में बड़े डाटा रिलीज़ प्रकाशित किए; भारतीय पत्रकारों ने इन दस्तावेज़ों में भारतीय व्यक्तियों के संदर्भों की खोज की। कुछ भारतीय प्रकाशनों ने DOJ दस्तावेजों के हवाले से केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी या उनकी परिवार से जुड़ी सामग्री प्रकाशित की, जिसके बाद मानहानि के दावों और कानूनी कार्रवाइयों की श्रृंखला शुरू हुई। (US DOJ disclosures, 30 Jan 2026) दिल्ली उच्च न्यायालय का आंशिक निषेधाज्ञा आदेश: 17 मार्च 2026 को दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अंतरिम आदेश में ऑनलाइन ऐसी सामग्री के भारत में प्रदर्शित होने को हटाने/ब्लॉक करने का निर्देश दिया, जो हरदीप पुरी की पुत्री हिमयानी पुरी को Jeffrey Epstein से जोड़ती थी; अदालत ने कुछ उपयोगकर्ताओं को उस सामग्री के प्रसार से रोका जबकि मानहानि के मुकदमों की सुनवाई जारी थी। हिमयानी पुरी ने कहा कि यह सामग्री 22 फरवरी 2026 के आसपास सार्वजनिक हुई थी। (Delhi High Court interim order, Bar & Bench / India Today, 17 Mar 2026) कथित आरोपों और प्रकाशित चित्रों का दावों‑विरोध: कुछ मीडिया हाउसों ने DOJ या अन्य स्रोतों का हवाला देते हुए हरदीप पुरी और/या परिवार के सदस्यों के कथित संपर्कों की रिपोर्टें चलायीं; इन रिपोर्टों के चलते मुक़दमों, अदालतों में आंशिक रोक और आधिकारिक खंडनों के दौर भी रहा। जहाँ एक ओर कुछ प्रकाशनों ने आरोपों को बहुपक्षीय जाँच का मामला बताया, वहीं प्रभावित पक्षों ने खंडन और कानूनी चुनौती दर्ज कराई है। (India Today, Bar & Bench, DOJ disclosures) स्थिति का समेकित विवरण: द इंडियन एक्सप्रेस की 23 सितंबर रिपोर्ट इस समय की सबसे ताजा और केंद्रीय घटना के रूप में सामने है — उसने चुनाव आयोग के भीतर दर्ज की गई औपचारिक आपत्तियों और SIR प्रक्रियाओं में कथित असहमति का विवरण दिया। इसके बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ, सार्वजनिक विरोध और कुछ राज्यों में पूछताछ/विवेचना के निर्देश सामने आए हैं। हरदीप पुरी‑संबंधी दावे DOJ दस्तावेज़ सार्वजनिक होने और बाद की मीडिया रिपोर्टिंग से जुड़े हैं; दिल्ली हाईकोर्ट ने 17 मार्च 2026 को ऐसे कुछ सामग्री‑प्रसार पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया था। (Indian Express; UNI; AajTak; Bar & Bench; US DOJ; India Today) विवादों पर खुली नोट: उपर्युक्त घटनाओं में कुछ तथ्य केवल एक स्रोत द्वारा रिपोर्ट किए गए हैं (उदा. The Indian Express की रिपोर्ट में आयोग के दो आयुक्तों की औपचारिक आपत्तियों का विस्तृत हवाला)। अन्य बिंदु—जैसे DOJ के दस्तावेज़ों का प्रकाशन और दिल्ली HC का आंशिक निषेध—कई स्रोतों में दर्ज हैं। जहां रिपोर्टों के बीच विवरण बदलते हैं या कोई पक्ष विवादित दावे खंडित करता है, उन्हें ऊपर स्रोत‑आधारित रूप में दिखाया गया है।
एसआईआर, ज्ञानेश कुमार और हरदीप पुरी के मामलों से जूझती सरकार; चुनावी दबाव और आयोग पर आरोप गरमाए
एसआईआर, ज्ञानेश कुमार और हरदीप पुरी मामले से जूझ रही सरकार! सर पर आधा दर्जन विधानसभाओं में चुनाव सर पर हैं। दूसरी ओर चुनाव आयोग की धांधलियों का लगातार खुलाा हो रहा है। देश के कुछ मीडिया हाउसेस ने साहसी पत्रकारिता करते हुए चुनाव आयोग और मोदी सरकार की साजिशों का पर्दाफाश कर दिया। मोदी सरकार को लगातार विपक्ष निशाने पर ले रहा है। वहीं दूसरी ओर यूएस के न्याय विभाग ने कैबिनेट मिनिस्टर हरदीप पुरी का कुख्यात बाल यौन शोषण अप
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