दिल्ली के गृह विभाग ने जुलाई के बड़े प्रदर्शन के बाद उन लोगों के खिलाफ प्रतिकूल कानूनी कदम न उठाने का आदेश दिया है जो NEET (UG) से जुड़े रैलियों में शामिल हुए थे। अधिकारियों ने यह स्पष्ट किया है कि इसका दायरा कुछ मामलों पर लागू नहीं होगा और संबंधित मामलों की स्थिति का पुनरावलोकन कर आवश्यक लोगों को जल्द रिहा किया जाएगा।

प्रशासन की घोषणा के साथ यह आश्वासन भी जुड़ा है कि वे विशेष रूप से ऐसे व्यक्तियों पर राहत नहीं देंगे जिनके खिलाफ पहले से आपराधिक रिकॉर्ड मौजूद है। यह शर्त सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप रखी गई है, जिसके तहत बिना आपराधिक प्रकरणों के कोष्ठक में आने वालों पर रोक-टोक लगाने की सीमाएँ लागू की जा रही हैं।

कुछ दिन पहले राजधानी में आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच टकराव की खबरें आईं और पुलिस ने कई जगहों पर गिरफ्तारी तथा FIR दर्ज करने की कार्रवाई की थी। प्रदर्शनकारियों और वकालत करने वाले समूहों ने कुछ मामलों में गिरफ्तारी और हिरासत को अनुचित और अति-न्यायिक बताया है; प्रशासन ने कहा है कि ऐसे आरोपों की समीक्षा की जाएगी और जिन मामलों में रिहाई संभव होगी वहां जल्द कार्रवाई की जाएगी।

सरकारी आदेश में यह भी कहा गया है कि जिन मामलों में पहले से आपराधिक प्रविष्टियाँ हैं, उन पर अलग प्रक्रिया लागू होगी और ऐसे आरोपियों पर सामान्य रियायतें नहीं मिलेंगी। अधिकारियों ने यह मानते हुए तेज कार्रवाई की सुनिश्चितता दी है कि समीक्षा एवं रिहाई प्रक्रियाएँ त्वरित रूप से पूरी की जाएँगी जहाँ आवश्यक हो।

इस निर्णय के बाद दिल्ली में यह उम्मीद जगी है कि कई छात्रों और प्रदर्शनकारी समूहों के फौरी कानूनी बोझ पर पुनर्विचार होगा, जबकि कानून प्रवर्तन एजेंसियों और प्रशासन ने साफ किया है कि गंभीर आरोपों व आपराधिक इतिहास वाले मामलों में सूचनात्मक और वैधानिक प्रक्रियाएँ जारी रहेंगी।

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संदर्भ स्रोतIndian Express DelhiIndian Express LatestNDTV LatestThe Hindu National
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