दिल्ली सरकार के गृह विभाग ने 30 जुलाई को एक आदेश जारी कर कहा है कि राष्ट्रीय राजधानी में NEET-UG पेपर लीक के विरोधों में शामिल होने वाले अधिकतर लोगों के विरुद्ध आगे कोई नकारात्मक कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। आदेश में यह भी कहा गया है कि जिन मामलों में पहले से गिरफ़्तारी या हिरासत हुई है, उन मामलों की समीक्षा कर गिरफ़्तार व्यक्तियों की रिहाई की प्रक्रिया त्वरित रूप से पूरी की जाएगी। (सूत्र: The Hindu, Times of India)

आदेश या राहत का लाभ उन लोगों पर लागू नहीं होगा जिनके खिलाफ पहले से आपराधिक मामले दर्ज हैं या जिनके खिलाफ हिंसा, तोड़फोड़ जैसे सार्वजनिक व्यवस्था भंग करने वाले आरोप हैं; इस अपवाद को हालिया सुप्रीम कोर्ट के संदर्भ के साथ तवज्जो दी गई है। (सूत्र: The Hindu, Times of India)

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब Cockroach Janta Party (CJP) ने लगभग 36 दिनों तक चलने वाले विरोध के बाद प्रदर्शन रोक दिया था। CJP का कदम उस समय हुआ जब केंद्र ने पार्टी की तीन मुख्य माँगों—कई विरोधकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों की वापसी, भविष्य में उन पर कोई कार्रवाई न होना, और पेपर लीक से जुड़े कुछ आत्महत्याओं के परिजनों के लिए मुआवजा—पर सहमति जताई, तथा उसी क्रम में शिक्षा मंत्रालय के उस समय के मंत्री से इस्तीफा भी जुड़ा था। (सूत्र: The Hindu, Times of India)

हालाँकि CJP के शीर्ष नेताओं ने बाद में केंद्र पर वादे नहीं निभाने का आरोप लगाते हुए ताजा आन्दोलन की चेतावनी भी दी। पार्टी के संयोजकों ने छात्रों के प्रति पुलिस जांच और संभावित प्रताडना की शिकायतें उठाई और कहा कि यदि आश्वासनों का पालन नहीं हुआ तो वे नए सिरे से आंदोलन कर सकते हैं। (सूत्र: The Hindu, Times of India)

सरकारी आदेश का पालन कैसे होगा, किन मामलों में समीक्षा त्वरित करेंगे और संबंधित पुलिस इकाइयाँ कब तक कार्रवाई बंद रखेंगी—इन तकनीकी पहलुओं पर अभी और स्पष्टीकरण आना बाकी है। दिल्ली पुलिस और गृह विभाग की अगली कार्यवाही पर निगरानी और कानूनी दस्तावेज़ों के प्रकाशन से ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी। (सूत्र: The Hindu, Times of India, NDTV India)

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संदर्भ स्रोतThe Hindu DelhiTimes of India DelhiNDTV India
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