दिल्ली हाईकोर्ट की एकल न्यायाधीश पीठ ने श्रद्धा वॉकऱ के भाई द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए मुक़दमे की समाप्ति के लिए किसी निश्चित समय-सीमा का आदेश देने से इनकार कर दिया। याचिका में निचली अदालत से मुक़दा शीघ्रता से ख़त्म करने और अनावश्यक स्थगन न दिए जाने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था।
पीठ की अध्यक्षता न्यायमूर्ति मदhu जैन ने कहा कि निचली अदालत मामले की सुनवाई दिन-प्रतिदिन ले रही है और इस कारण अधिक निर्देश देने की आवश्यकता नहीं है। मामला निचली अदालत में निरंतर उठाया जा रहा है, परांतू अवकाश के दिनों—शनिवार और रविवार—को सुनवाई नहीं होती।
दिल्ली पुलिस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अमित प्रसाद ने अदालत को बताया कि कुल 200 से अधिक गवाह हैं और इनमें से 157 गवाहों की गवाही पहले ही पूरी हो चुकी है। इसी आधार पर सरकार के पक्ष ने अदालत को सूचित किया कि सुनवाई नियमित रूप से हो रही है।
याचिकाकर्ता ने दलील दी कि मुक़मा अनावश्यक रूप से लंबित है, जिससे आपराधिक न्याय की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है और यह त्वरित सुनवाई के संवैधानिकाधिकार के सिद्धांत के विरुद्ध है।
मामले की पृष्ठभूमि में, वॉकऱ का कथित हत्या-घटनाक्रम 18 मई 2022 का है। अभियोजन के अनुसार आरोपी आफताब अमीन पूनावाला पर हत्या, शव-विभाजन और अवशेषों को फ्रिज में रखने तथा अलग-अलग स्थानों पर निस्तारण करने का आरोप है; इस मामले की चार्जशीट पुलिस ने 6,629 पृष्ठों में दायर की है।
हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई पूरी कर के उस पर और आदेश नहीं दिए तथा यह मामला निचली अदालत में आगे चल रहा है।

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