3 अगस्त 2026 को संसद के मानसूनी सत्र के 11वें दिन दोनों सदनों में विधायी कामकाज और प्रतिरोध का मिश्रित दृश्य रहा। सुबह लोकसभा की कार्यवाही में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्याओं से संबंधित संशोधन विधेयक पारित हो गया; यह बिल सर्वोच्च न्यायालय के संवैधानिकीकृत पदों की कुल संख्या बढ़ाने का प्रयास करता है और इसे सदन ने मतदान के बिना (वॉइस वोट) मंज़ूरी दी।

उसी दौरान लोकसभा में बैंकर्स’ बुक्स एविडेंस बिल और इन्डियन स्टैटिस्टिकल इंस्टिट्यूट बिल भी सदन में प्रस्तुत किए गए। इन प्रस्तुतियों के बाद विपक्षी सदस्य गृह मंत्री अमित शाह से 20 जुलाई की छात्र-आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई के संबंध में बयान माँगते हुए बार-बार नारे लगाने लगे, जिससे कई बार कार्यवाही बाधित हुई और लोकसभा को अन्ततः दिन भर के लिए स्थगित करना पड़ा।

राज्यसभा में माइक्रो, स्माल और मीडियम एंटरप्राइजेज (एमएसएमई) डेवलपमेंट (संशोधन) बिल पर चर्चा हुई; इस विधेयक में अदालतों को उन आपूर्तिकर्ताओं को कम-से-कम 50% पुरस्कार राशि का आदेश देने का प्रावधान शामिल किया गया है जब चुनौती लंबित रहे, और इसे सदन ने वॉइस वोट से पारित कर दिया। राज्यसभा की कार्यवाही भी विपक्ष के लगातार विरोध के कारण कई बार प्रभावित हुई और बाद में दुपहर के लिए स्थगित कर दी गई।

दिन भर की घटनाओं में विपक्ष ने न केवल 20 जुलाई के प्रदर्शन पर पुलिस की कथित कठोर कार्रवाई—जिसमें लाठीचार्ज, आंसू गैस और पेलेट गन के इस्तेमाल के आरोप उठे—पर स्पष्टीकरण मांगा, बल्कि राम मंदिर दान-नकदी मामले से जुड़ी कथित गड़बड़ियों के बारे में भी सरकार से जवाबदेही की मांग दोहराई।

सत्र की आधिकारिक सूची के अनुसार यह मानसूनी सत्र 20 जुलाई से चल रहा है और 13 अगस्त तक निर्धारित है; इसके बावजूद दोनों पक्षों के बीच गतिशीलता और बार-बार की अवरोधक कार्रवाइयों ने विधायी एजेंडा को प्रभावित किया है। आगामी दिनों में सदनों की कार्यवाही फिर से शुरू होगी और अनिश्चितकालीन रोक-टोक के बीच कई प्रस्तावों पर आगे निर्णय की संभावना बनी हुई है।

संदर्भ स्रोतThe Hindu NationalNDTV LatestIndian Express IndiaHindustan Times India
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