Hisorical lost for BJp=पीके की जीत के मायने और भाजपा का अहंकारबिहार में भाजपा कई कारणों से हारी है इस बात की चर्चा हो रही है। यह कहा जा रहा है कि बिहार में अब पूरी तरह से भाजपा के चंगुल में है। बिहारवासियों को उम्मीद भाजपा से थी वो पूरी नहीं हो सकी है। इसके साथा भाजपा ने जिन हाथों मेंं प्रदश की कमान सौंपी है वो किसी भी सूरत में सीएम लायक नहीं है ये भी एक मुद्दा रहा है। सम्राट चौधरी पर हत्या, फ्राड और आपराधिक बैकग्राउन्ड होने के बावजूद दिल्ली दरबार ने सीएम पद पर बैठाया है। इस बात का भी उपचुनाव में देखने को मिला है। Criminal back ground CM of Biharदिल्ली दरबार पर यह आरोप भी लग रहा है कि बिहार बीजेपी में कोई योग्य व शिक्षित नेता नहीं रहा जिसे बिहार की कमान दी जाती। इसका असर बीजेपी में भी दिख रहा है। इसके साथ ही बिहार में आपराधिक गतिविधियों में बेतहाशा इजाफा हुआ है। अपराधी निडर हो कर वारदातोंं को अंजाम दे रही है उन पर पुलिस का खौफ खत्म हो गया है। दूसरी ओर जनसुराज के संस्थापक पीके ने पूरे उप चुनाव में सम्राट चौधरी के अपराधों और भ्रष्टाचार का खुलकर जनता के बीच उठाया। इसके अलावा सीजेपी के युवाओं के आदोलन ने भी अपना प्रभाव दिखाया है।छात्रों के आंदोलन और बेरोजगारो की वजह से हुआ परिवर्तनसीजेपी के आंदोलन के बाद बिहार में बांकीपुर उप चुनाव में भाजपा को हार का मुंह देखना पड़ा है इसके अलावा कई जगहों पर कांग्रेस के उम्मीदवारों को उप चुनाव मेंं जीत मिली है। काक्रोच जनता पार्टी के आंदोलन का प्रभाव भी इन चुनावों में पड़ा है इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है। बिहार में एनडीए की सरकार है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि यह सीट बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की सीट थी वहां चुनाव हार जाना भाजपा के लिये अपमान की बात है। लोग चर्चा कर रहे हैं कि अब देश में भाजपा का दाना पानी उठ गया है। 12 साल में पहला मौका है कि मोदी शाह निरीह दिख रहे है। यह चर्चा है कि अब मोदी शाह के बुरे दिन शुरू हो गये हैं। सरकार की उल्टी गिनती शुरू हो गयी है। सदन से मोदी शाह विपक्ष हमलों से बचने की जुगाड़ मेंं हैं।
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