पीएम के नाम खुला पत्र: युवाओं के प्रति पुलिस और सरकार नरमी बरतें

प्रदर्शनकारियों के सोशल मीडिया और इंस्टा पर पीएम मोदी को लेकर एक अभियान छेड़ दिया। इस बात से पीएम मोदी को अपनी इमेज पर डेंट लगता दिखा। तभी से पीएम मोदी ने युवाओं को रिझाने के लिये रोज रील बना कर इंस्टा पर पोस्ट करना शुरू कर दिया है। वो इंस्टा पर युवाओं ताकत को देख चुके हैं। अपनी मीठी मी​ठी बातों से वो युवाओं को बरगलाने का प्रयास कर रहे हैं। रील में वो जेन जी को फ्रेंडस कह कर संबोधित कर रहे हैं। एक झटके में ही मित्रों से फ्रेंड्स पर आ गये हैं। एक तरफ वो युवओं को इस बात का आश्वासन दे रहे हैं कि उन्होंने गाली देने वाले युवाओं को माफ कर दिया है वहीं दूसरी ओर पुलिस छानबीन के नाम पर युवा प्रदर्शकारियों उत्पीड़न कर रहे हैं। पीएम मोदी इस बात पर ध्यान दें कि प्रदर्शनकारियों में 95 प्रतिशत युवा हैं जो कि विकसित देश के लिये मजबूत आधार शिला हैं। अगर देश की युवा शक्ति खिलाफ हो गयी तो सत्ता तो हाथ से जायेगी ही सत्ताधारी दल का नाम ओ निशान ही मिट जायेगा। समय रहते चेत जाइये वरना विश्वगुरु बनने का ख्वाब मिट्टी में मिल जायेगा।मोदी को अब रील्स का सहाराप्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने पीएम मोदी के बारे में अभद्र भाषा का प्रयोग किया। इस बात से पीएम मोदी को लगा ऐसा ही रहा तो उनके चौथी बार पीएम बनने के सपने का क्या होगा। इसलिये पहले धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लिया गया। सरकार ने सीजेपी के करार किया कि वो अन्य मांगों को भी जल्द ही पूरा करेंगे। सीजेपी की मांग थी कि प्रदर्शन के दौरान जिन लोगों के खिलाफ पुलिस ने केस दर्ज करे थे वो वापस लिये जायेंगे। वो आज तक पूरे नहीं किये हैं। इसके अलावा आत्महत्या करने वाले सभी 22 छात्रों के परिजनों को एक एक करोड़ रुपये देने की बात पूरी नहीं की गयी है।बीस जुलाई को संसद मार्ग पर प्रदर्शकारियों पर जो जुल्म दिल्ली पुलिस ने ढाया है। उसके बाद देश दुनिया में बर्बरतापूर्व लाठीचार्ज की निंदा की जा रही है। 12 सालों पहली बार केन्द्र की मोदी सरकार को दबाव में देखा जा रहा है। इस आंदोलन ने न केवल सरकार को बल्कि विश्वगुरु नरेंद्र मोदी को भी बुरी तरह हिला कर रख दिया है। प्रदर्शनकारी शिक्षा विभाग के भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन को लेकर धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफे की मांग कर रहे थे। लेकिन पुलिस की हैवानियत और बर्बरतापूर्ण लाठीचार्ज के बाद से पूरे देश से क्षुब्ध युवाओं ने पीएम मोदी के खिलाफ अभियान छेड़ दिया। देश आज समय में दो खेमों में बंट चुका है। एक खेमा युवाओं की समस्याओं और सरकार की निष्क्रियता पर एक जुट है तो वहीं दूसरी ओर सत्ता समर्थक और सरकार के पैरोकार पीएम के साथ खड़े दिख रहे हैं। ये बात जगजाहिर है कि पीएम मोदी अपनी छवि को लेकर कितने सजग रहते हैं। देश की मीडिया और इवेंटमैनेजमेंट कंपनियों ने हम करदाताओं के खून पसीने की कमाई से पीएम मोदी की इमेज को देश विदेश में चमकाया है। लेकिन सीजेपी के आंदोलन ने उनकी छवि को जबरदस्त डेंट किया है। संसद मार्ग मार्च ने सरकार और पीएम मोदी की नींदें उड़ा दी है।

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