प्रधानमंत्री ने जुलाई के अंतिम दिनों में एक देर रात जारी इंस्टाग्राम संदेश में कहा कि जंतर मंतर के विरोध प्रदर्शन के दौरान उनके और उनकी दिवंगत माता के खिलाफ इस्तेमाल की गई अपशब्दावली गहरी पीड़ा पहुंचाने वाली थी, फिर भी वे उन छात्रों को माफ करना चाहते हैं और समाज से भी यही आशा जताई। 여러 समाचार संस्थानों में प्रकाशित कवरेज के अनुसार प्रधानमंत्री ने छात्रों को 'भटकाए गए' कहा और कहा कि दंड देना या उन्हें लंबी कानूनी प्रक्रियाओं में उलझाना समस्याओं का समाधान नहीं करेगा; इसके बजाय युवाओं को सही राह दिखाने का काम समाज का होना चाहिए।
यह संदेश ऐसे समय में आया जब दिल्ली और नोएडा में सोशल मीडिया पर वायरल कुछ वीडियो और टिप्पणियों के बाद पुलिस ने प्रकरण दर्ज किए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक जंतर मंतर पर हुए विरोधों का संदर्भ नेशनल एंट्रेंस टैस्ट (NEET) से जुड़े अनियमितताओं के आरोपों से जुड़ा रहा, और इसी पृष्ठभूमि में यह वीडियो साझा किया गया।
प्रधानमंत्री ने युवाओं से आगे बढ़कर अपने सपनों को पूरा करने और गलतियों से सीखने का आह्वान भी किया। कई प्रकाशनों ने बताया कि उन्होंने समाज को आग्रह किया कि वे इन युवाओं को बहिष्कृत न करें बल्कि उन्हें फिर से देश की प्रगति में शामिल करने का प्रयास करें।
समाचार कवरेज के अनुसार वीडियो का स्वर और प्लेटफॉर्म—इंस्टाग्राम—दोनों का उल्लेख किया गया और इसे देर रात जारी बताया गया। कुछ रिपोर्टों में बताया गया है कि पुलिस ने दिल्ली और नोएडा में दर्ज कम्प्लेन्ट/एफआईआर के साथ जाँच शुरू कर दी है; इसी क्रम में स्थानीय संस्थानों ने सोशल मीडिया पर उठ रहे आरोपों की भी जांच का जिक्र किया।
समग्र रूप से चारों स्रोतों में यह संगति दिखती है कि प्रधानमंत्री ने सार्वजनिक नियंत्रण और दंड के बजाय सुलह और मार्गदर्शन की वकालत की है, और यह बयान उस व्यापक छात्र आंदोलन एवं संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं की पृष्ठभूमि में आया।

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