चैनई स्थित विशेष CBI अदालत ने 30 जुलाई 2026 को गिरोह नेता छोटा राजन को भारतीय पासपोर्ट धोखाधड़ी के मामले में दोषी ठहराया और सात वर्ष की जेल की सजा दी। CBI की ओर से दर्ज सूचना के अनुसार अभियोग का केंद्र यह था कि आरोपी ने ‘‘विजय कदम’’ की पहचान अपनाकर पासपोर्ट के लिए फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत किए थे।

एजेंसी के बयान में बताया गया कि जांच में यह सामने आया कि पासपोर्ट के लिये पेश किए गए निशानियों में स्कूल ट्रांसफर सर्टिफिकेट और राशन कार्ड जैसे कागजात नकली थे। CBI ने यह भी निर्धारित किया कि पासपोर्ट पर दर्शायी गयी पहचान वास्तव में राजेंद्र उर्फ नाना उर्फ छोटा राजन की ही थी।

CBI ने इस मामले में FIR 19 मार्च 2002 को दर्ज की और 22 जनवरी 2004 को चार्जशीट दाखिल की थी; उसके बाद वर्षों तक मामले की सुनवाई चली। समाचार एजेंसियों की रिपोर्टों के संदर्भ में यह फैसला उन लंबी कानूनी प्रक्रियाओं का परिणाम है जिनका संचालन दशकों तक रहा।

वहीं, न्यायिक फैसला सुनाने के बाद यह भी स्पष्ट किया गया कि छोटा राजन बरी तरह से स्वतंत्र नहीं है: वह फिलहाल दिल्ली के तिहाड़ जेल में बंद है और अन्य संगीन मामलों में भी उम्रकैद सहित कई दंड भुगत रहा है। CBI ने अपने संक्षिप्त आधिकारीक बयान में इस मुकदमے के तथ्यों और जांच के निर्धारणों का उल्लेख किया है।

इस विकल्पी सजा से जुड़ा विवरण और दंड के अन्य आयाम, जैसे अर्थिक जुर्माना या अपीलीय समयरेखा, न्यायालय की आधिकारिक आदेश प्रतियों में परिलक्षित होंगे। मामले की पेशी, आरोप-प्रत्यारोप और कोर्ट के निर्णय का यह क्रम राष्ट्रीय स्तर पर दंड व्यवस्था और पहचान पत्रों की सुरक्षा से जुड़े प्रश्नों को फिर से उभारता है।

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संदर्भ स्रोतIndia Today NationHindustan Times IndiaMint News
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