घटना‑क्रम और विषय
23 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फेसबुक पोस्ट कुछ घंटे के लिए हट गया; Meta ने बाद में इसे एआई‑सम्बंधी तकनीकी त्रुटि बताकर बहाल किया। (सूत्रों के अनुसार हटाने का समय लगभग पाँच‑छह घंटे था।)
इस घटना के बाद केंद्र ने प्लेटफॉर्म से जवाब माँगा और Meta के वैश्विक प्रतिनिधि‑दल—जिसे कंपनी के चीफ ग्लोबल अफेयर्स अधिकारी जोएल कप्लान नेतृत्व दे रहे थे—से पांच और छह अगस्त को विस्तृत चर्चा हुई। प्रतिनिधिमंडल ने पहले सूचना प्रौद्योगिकी सचिव से मिटी बैठक की और बाद में केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री से भी मिला।
बैठकों में उठाए गए मुख्य मुद्दे
सरकारी पक्ष ने प्लेटफॉर्म के कंटेंट‑मॉडरेशन तंत्र, एआई‑निर्भर फिल्टर की विफलता और उस पर कथित तौर पर होने वाले प्रभाव की गंभीरता पर स्पष्ट चिंता व्यक्त की। साथ ही बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM), डीपफेक सामग्री और उच्च‑प्रोफ़ाइल खातों के संरक्षण को लेकर भी सवाल उठाए गए।
सरकार ने यह तर्क रखा कि Meta के एल्गोरिथम और विज्ञापन‑बूस्टिंग यह तय करते हैं कि कौन‑सी पोस्ट किस तक पहुँचेगी; इसलिए कंपनी को केवल निष्क्रिय इंटरमीडियरी मानना ठीक नहीं होगा। केंद्र ने चेतावनी दी कि यदि इंटरमीडियरी‑रक्षा (सेफ‑हार्बर) लागू न मानी गई तो कानूनी दायित्वों में बदलाव हो सकते हैं।
Meta की स्वीकृति और आश्वासन
Meta के प्रतिनिधियों ने बैठकों में प्लेटफॉर्म सम्बन्धी खामियों और मॉडरेशन में हुई गलतियों के लिए खेद व्यक्त किया और प्रधानमंत्री के पोस्ट के अस्थायी हटाए जाने पर माफी जतायी। कंपनी ने यह भी स्वीकार किया कि कुछ प्रकार के कंटेंट को बूस्ट करने के लिए बड़े पैमाने पर धन खर्च हुआ।
आगे की कार्रवाइयां
सरकार ने Meta से अतिरिक्त स्पष्टीकरण और आगे की बैठकों की माँग की है। संसदीय स्थायी समिति ने भी Meta के सीईओ को माफी देने के लिए कहा और चेताया है कि आवश्यक जवाब नहीं मिलने पर सुरक्षा‑रक्षा की छूट पर पुनर्विचार हो सकता है।
यह मामला नियमन, तकनीकी जवाबदेही और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर राष्ट्रीय कानूनों के अनुपालन के सवालों को आगे बढ़ाता है।
Meta ने माफी मांगी; केंद्र ने एल्गोरिथम‑आधारित प्रसार और पेड बूस्टिंग पर जवाब माँगा
केंद्र और Meta के वैश्विक प्रतिनिधिमंडल के बीच अगस्त की शुरूआती तारीखों में हुई बैठकों में प्रधानमंत्री के फेसबुक पोस्ट के अस्थायी हटाए जाने, बाल यौन शोषण सामग्री और प्लेटफॉर्म‑कदमों पर तीखी पूछताछ हुई। सरकार ने कहा कि एल्गोरिथम और विज्ञापन‑बूस्टिंग प्लेटफॉर्म को निष्पक्ष 'इंटरमीडियरी' नहीं ठहरा सकते।
AI-generated प्रतिनिधि चित्र
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