मिशिगन में मंगलवार की रात और अगली सुबह जारी काउंट के बाद प्रोग्रेसिव नेता अब्दुल एल-सेय्यद को डेमोक्रेटिक सेनेटल उम्मीदवार के रूप में लाभप्रद बढ़त के साथ प्रोजेक्ट किया गया। परिणाम बेहद कड़े रहे; लगभग एक प्रतिशत से भी कम अंतर और मतदानों की गिनती में हज़ारों मतों के अंतर के साथ लीड तय हुई।
यह चुनाव क्षेत्रीय और राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर महत्व रखता है क्योंकि यह सीट रिटायर हो रहे डेमोक्रेट सीनेटर गैरी पीटर्स के स्थान के लिए है और नवंबर में सीनेट नियंत्रण पर असर डाल सकती है। रिपब्लिकन पक्ष से माइक रोजर्स ने पार्टी की नामांकन प्रक्रिया में आगे बढ़ना तय कर लिया था और वे नोवेम्बर में एल-सेय्यद के प्रतिद्वंद्वी होंगे।
प्राइमरी ने दल के भीतर प्रोग्रेसिव और मिडिल-रोड प्रवृत्तियों के बीच गहरे मतभेद उजागर किए। एल-सेय्यद ने सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (Medicare for All), राजनीतिक वित्त सुधार और इस्राइल को बिना शर्त सैन्य सहायता रोकने जैसे विषयों को अपने अभियान का केंद्र बनाया। उनका समर्थन वेर्नोट सीनेटर और कुछ राष्ट्रीय प्रोग्रेसिव नेताओं से मिला। वहीं हेली स्टीवंस ने अनुभव, निर्माण-क्षेत्र और मध्यमार्गी विकल्प पर जोर दिया और राज्य नेतृत्व के कुछ प्रमुख डेमोक्रेट ने उनका समर्थन किया।
यह रेस बाहरी फंडिंग की सबसे महंगी लड़ाइयों में से एक बनी: स्टीवंस के पक्ष में बड़े पैमाने पर बाहरी खर्च दर्ज किया गया, जिसमें प्रासंगिक समूहों की ओर से उल्लेखनीय निवेश सामने आया। उस भारी बाहरी खर्च ने इस्राइल नीति को भी चुनाव के केंद्र में ला दिया, भले ही प्रचारप्रसार में आरोप-प्रत्यारोप सीधे शब्दों में न दिखे।
प्राइमरी के बाद एल-सेय्यद ने समर्थकों से पार्टी एकजुट करने का आह्वान किया और अगले चरण—नवंबर की सामान्य चुनाव लड़ाई—पर फोकस करने की बात कही। स्टीवंस ने भी प्रतिस्पर्धा स्वीकार की और समर्थन देने की बात सार्वजनिक रूप से कही। अब डेमोक्रेटों के लिए चुनौती यही है कि वे प्राइमरी में उभरे फटा हुआ मतदाता तंत्र जोड़कर रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी को हराने के लिए कैसे तत्पर हों।

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