दिल्ली के पूर्व सांसद और लंबे समय तक कांग्रेस नेता रहे सज्जन कुमार का तिहाड़ जेल से सफदरजंग अस्पताल लाए जाने पर गुरुवार को निधन हुआ। अस्पताल सूत्रों ने बताया कि उन्हें अस्पताल लाया गया था और उन्हें मृत घोषित किया गया। (PTI/LiveMint, Indian Express)

सज्जन कुमार तीन बार लोकसभा सदस्य रहे और 1984 के सिख विरोधी दंगों के विभिन्न मामलों में लंबित मुकदमों का सामना कर रहे थे। 17 दिसंबर 2018 को दिल्ली उच्च न्यायालय ने राजनगर मामले में उन्हें दोषी ठहराकर आजीवन कैद की सजा सुनाई; इसके बाद वे दिसंबर 2018 में आत्मसमर्पण कर तिहाड़ जेल में बंद रहे। (Indian Express, LiveMint)

फरवरी 2025 में दिल्ली की एक विशेष न्यायालय ने सरस्वती विहार मामले में भी उन्हें दूसरा आजीवन कारावास दिया; उस फैसले में न्यायालय ने उम्र और चिकित्सा स्थितियों का हवाला देते हुए मृत्युदंड नहीं दिया। (Times of India, LiveMint)

जनकपुरी-विकासपुरी मामलों में जनवरी 2026 में उन्हें बरी भी किया गया था; कुछ मामलों में उनका बचाव और कुछ में दोषसिद्धि रही—उनकी अनगिनत अपीलें और आपत्तियाँ उच्च न्यायालय तथा सर्वोच्च न्यायालय में लंबित रहीं। (Indian Express, Times of India)

सज्जन कुमार की तबीयत और जेल में उनके स्वास्थ्य संबंधी अनुरोधों पर वे बार-बार राहत और पैरोल के लिये चिकित्सकीय आधार प्रस्तुत करते रहे। अंतिम दिनों में उन्हें उच्च रक्तचाप और पार्किंसंस जैसी पुरानी बीमारियाँ थीं, जिनका हवाला खबरों में दिया गया है। (LiveMint, Times of India)

उनकी मृत्यु ने कांग्रेस के लिए राजनीतिक संवेदनशीलता पैदा कर दी है; पार्टी नेतृत्व की ओर से प्रारम्भिक प्रतिक्रियाएँ मिश्रित रहीं। (The Hindu, Times of India)

यह रिपोर्ट उपलभ्य स्वतंत्र समाचार स्रोतों के साथ-सहयोग से संकलित है।

संदर्भ स्रोतIndian Express DelhiTimes of India Top StoriesMint NewsThe Hindu National
पाठकों की राय

टिप्पणियां 0

सभ्य और विषय से जुड़ी भाषा का प्रयोग करें।