दिल्ली हाईकोर्ट की एक पीठ — चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया — ने बुधवार को लक्ष्मी योजना में एक शर्त पर सवाल उठाए जिसके तहत लाभार्थी महिला को अपने क्षेत्र के सांसद या विधायक से अनुशंसा पत्र चाहिए। यह विवाद एक जनहित याचिका से उठकर आया है जिसे पूर्व कांग्रेस पार्षद अभिषेक दत्त और पार्षद वेदपाल शीतल चहार्य ने दायर किया है।

याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि ऑनलाइन पंजीकरण पोर्टल पर अनुशंसा पत्र को अनिवार्य करने से राजनीतिक प्रतिनिधियों को अत्यधिक विवेक मिल जाता है और यह वेलफेयर सुविधा को राजनीतिक द्वारपालता में बदल सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि ऐसी शर्त से कमजोर आबादी, विशेषकर अनौपचारिक बस्तियों की महिलाएं, दूरी और परिवहन की समस्याओं के कारण अक्षम हो सकती हैं।

कोर्ट ने कहा कि योग्यता पहले से ही योजनात्मक मापदण्डों में स्पष्ट हैं — आय सीमा, उम्र, परिवार में सबसे बड़ी महिला, दस वर्षों का दिल्ली निवास आदि — और यह देखा जाना चाहिए कि क्या इन्हें प्रासंगिक दस्तावेजों से सत्यापित किया जा सकता है। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने सरकार के वकील से इस पहलू पर निर्देश लेने को कहा और कहा कि फिलहाल वह इस प्रकार की अनिवार्यता को स्वीकार नहीं कर सकता।

अदालत ने नोट किया कि योजना में अनुशंसा-आवश्यकता का प्रावधान स्वयं नियमों में उल्लेखित नहीं है और इस पर आगे की सुनवाई 24 अगस्त को होगी। याचिका में यह भी मांग की गई है कि योग्यता और सत्यापन के लिए पारदर्शी, वस्तुनिष्ठ प्रक्रियाएँ तय की जाएँ ताकि राजनीतिक हस्तक्षेप न हो।

संदर्भ स्रोतIndian Express DelhiHindustan Times DelhiThe Hindu Delhi
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