अमेरिकी राष्ट्रपति ने 19 अगस्त को सोशल मीडिया पोस्ट में ईरान के खिलाफ ‘‘सबसे क्रशिंग आर्थिक ऑपरेशन’’ और एक व्यापक आर्थिक अलगाव अभियान की घोषणा की, साथ ही कहा कि कोई भी देश जो ईरान को वित्तीय या कारोबारी सहारा देगा उसे ‘‘भारी आर्थिक परिणाम’’ भुगतने होंगे। (Sources: BBC, Indian Express)
घोषणा में तेल तस्करी, नकदी हस्तांतरण, एक्सचेंज हाउस, जहाज रजिस्ट्रियाँ और सामने की कंपनियों पर रोक लगाने की बात कही गई; राष्ट्रपति ने इसे ‘‘इकोनॉमिक डी‑डे’’ भी कहा और सहयोगी देशों से ईरान को अलग करने की अपील की। (Sources: BBC, Indian Express)
घरेलू और वैश्विक असर को लेकर ब्रोकरेज और बाजार प्रतिक्रिया देखी गई: तेल की कीमतों में उछाल और यूरोपीय शेयरों पर दबाव की खबरें आईं, जबकि अमेरिका ने बोंड‑खरीद बढ़ाने संबंधित बयान देकर बाजारों को स्थिर करने के उपायों का संकेत दिया। (Source: The Hindu; BBC)
तेहरान ने आरोप लगाया कि यह कदम अमेरिका की घरेलू आर्थिक समस्या और नीतिगत विफलताओं से ध्यान भटकाने का प्रयास है और ऐसे दबावों को ‘‘आर्थिक आतंकवाद’’ कहा गया। ईरानी विदेश मंत्रालय व वरिष्ठ कूटनयिकों ने चेतावनी दी कि दबाव और सख्ती द्विपक्षीय व क्षेत्रीय तनाव बढ़ा सकती है। (Sources: BBC, Indian Express)
क्षेत्रीय परिप्रेक्ष्य में यूएई ने हाल ही में ईरान के साथ कुछ आर्थिक/वित्तीय रिश्ते समाप्त करने का ऐलान किया है और खाड़ी में नौवहन‑संबंधी तनाव जारी है; चीन और अन्य बड़े तेल खरीदारों के साथ भी जुड़ी चुनौतियाँ कागजात में उभरीं। (Sources: BBC, The Hindu)
फिलहाल अमेरिकी आधिकारिक निकायों ने विस्तृत सूची या लक्षित देशों के नाम सार्वजनिक नहीं किये हैं; प्रशासन का रुख और उपाय किस रूप में लागू होंगे, यह समय के साथ स्पष्ट होगा। (Sources: BBC, Indian Express)

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